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Upper Caste Reservation: सामान्य वर्ग को आरक्षण देने वाले विधेयक को SC में चुनौती

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण देने के लिए संविधान के 124वे संशोधन विधेयक 2019 (124th Constitutional Amendment Bill 2019) को चुनौती देने के लिए एक एनजीओ यूथ फॉर इक्वलिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

Upper Caste Reservation: सामान्य वर्ग को आरक्षण देने वाले विधेयक को SC में चुनौती

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण देने के लिए संविधान के 124वे संशोधन विधेयक 2019 (124th Constitutional Amendment Bill 2019) को चुनौती देने के लिए एक एनजीओ यूथ फॉर इक्वलिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

एंटी-रिजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन ने गुरुवार को संसद के पास दिए गए संविधान (124वे संशोधन) विधेयक, 2019 (124th Constitutional Amendment Bill 2019) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

यह विधेयक आर्थिक और पिछड़ी उच्च जातियों के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को 10% आरक्षण प्रदान करता है। यह मंगलवार को लोकसभा में 323-3 के बहुतम से पारित किया गया था।

बुधवार को इसे बिल को राज्यसभा में रखा गया था। राज्यसभा में घंटों तक हुई बहस के बाद इस बिल पर वोटिंग हुई। सवर्ण आरक्षण बिल राज्यसभा में भी 165-7 के बहुमत से पारित कर दिया गया।

राज्यसभा ने मसौदा कानून को एक चयन समिति को भेजने के खिलाफ मतदान किया। यह बिल अब राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया है।

ये कहा याचिका में

गैर सरकारी संगठन (NGO) यूथ फॉर इक्वेलिटी (Youth For equality) और कौशल कांत मिश्रा ने याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा है कि एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता।

याचिका में कहा गया है कि इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती।

राज्य सभा ने बुधवार को 124वें संविधान संशोधन विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से पारित किया था। सदन ने विपक्षी सदस्यों के पांच संशोधनों को अस्वीकार कर दिया। इससे पहले, मंगलवार को लोक सभा ने इसे पारित किया था।

आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिये आरक्षण का यह प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गो को मिलने वाले 50 फीसदी आरक्षण से अलग है।

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