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नहीं रहे योगगुरू BKS आयंगर, बचपन की बीमारी के बाद भी बुलंद हौसलों से पाई कामयाबी

अयंगर किशोरावस्था से ही बीमार थे उन्हें अष्टांग योगा सीखा व किया और बाद में इस योगा को आयंगर योगा के नाम से भी जाना गया।

नहीं रहे योगगुरू BKS आयंगर, बचपन की बीमारी के बाद भी बुलंद हौसलों से पाई कामयाबी
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नई दिल्ली. देश के जाने-माने योग गुरू बेल्लुर कृष्णामाचर सुंदराराजा आयंगर (बी के एस आयंगर) का बुद्धवार सुबह देहांत हो गया। उनकी किडनी काम नही कर रही थी तो उन्हें डायलिसिस पर रखा हुआ था। वह पुणे के अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। डॉक्टर दिपाली मंडे ने पीटीआई से कहा की "मि. अयंगर का दिल कमजोर था और उनकी किडनी सामान्य रूप से काम नही कर रही थी। बढ़ती उम्र के कारण उनको परेशानी हो रही थी। तबियत खराब होने पर भी वह अस्पताल में भर्ती नही होना चाहते थे। गुर्दे काम नही करने के बाद उन्हें डायलिसिस पर रखा गया। योग गुरू को दिली बीमारी थी और उन्हें हार्ट अटैक भी चुके हैं।"

अयंगर किशोरावस्था से ही बीमार थे उन्हें अष्टांग योगा सीखा व किया और बाद में इस योगा को आयंगर योगा के नाम से भी जाना गया। इस गणतंत्र दिवस पर उन्हें पद्म विभूषण मिला था। उनका जन्म 14 दिसंबर 1918 को कर्नाटक के कोलार जिले के बेल्लुर गांव में हुआ था। उनका योगा स्टाइल व्यापक और वैकल्पिक रूप से बीकेएस स्कूल और आयंगर स्कूल में अभ्यास सिखाया जाता है। बेल्लुर कृष्णामाचर सुंदराराजा आयंगर कई सम्मान से नवाजे गये जैसे पदम विभूषण, पदम भूषण, पदमश्री और कन्नड़ राज्योत्सव आदि।

नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, विदेशों में भी काफी लोकप्रिय थे अयंगर-

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