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यमन: भूखमरी और कुपोषण से हर हफ्ते मर रहे हैं 1 हजार बच्चे

22 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

यमन: भूखमरी और कुपोषण से हर हफ्ते मर रहे हैं 1 हजार बच्चे
यमन. अरब के सबसे गरीब देश यमन में चल रहे गृहयुद्ध में बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं। वहां अकाल और भूखमरी की स्थिति भी पैदा हो गई है। उत्तरी यमन पर शिया हूती विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया है। हूती विद्रोही यमन की सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं जबकि सऊदी अरब यमन सरकार की ओर से यहां सैन्य कार्रवाई कर रहा है। इस युद्ध के कारण यहां अकाल और भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।
यूनीसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन में कुपोषण, भूखमरी और इलाज के अभाव में बच्चे डायरिया और निमोनिया जैसी साधारण बीमारियों से हर हफ्ते 1,000 बच्चे दम तोड़ रहे हैं। बच्चों की मौत की संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है। मालूम हो कि कुपोषण के शिकार बच्चों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कम हो जाती है।
बच्चों के शरीर पर मांस ही नहीं-
आपको बता दें कि भूख और हवाई बमबारी से लड़ रहे हजारों यमन नागरिकों में से एक 19 साल का मुहम्मद अली के 2 साल के चचेरे भाई की भूख से मौत हो गई। अली का एक छोटा भाई मोहन्नद है और अली को डर है कि कहीं उसका भाई भी भूख से न मर जाए। मोहन्नद की उम्र 5 साल है। कमजोरी और भूख के कारण वह ठीक से सांस भी नहीं ले पाता है। उसकी पसलियों के ऊपर मांस नहीं, चमड़े की एक पतली परत है। अली कहता है, 'कुपोषण के कारण मैं अपने चचेरे भाई को तो खो चुका हूं, लेकिन अब मैं अपने छोटे भाई को नहीं खोना चाहता।'
खाद्य पदार्थों की कीमतों में 60 फीसदी की बढ़ोत्तरी-
मार्च 2015 से ही सऊदी अरब के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन भयंकर हवाई बमबारी कर रहा है। सऊदी हूती विद्रोहियों को राजधानी सना से हटाने की कोशिश कर रहा है। राजधानी के साथ-साथ देश के ज्यादातर उत्तरी क्षेत्र पर हूती विद्रोहियों का ही कब्जा है। यमन में काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने जानकारी दी कि यहां खाद्य पदार्थों की कीमतों में 60 फीसद तक वृद्धि हो गई है।
लोग खाना भी नहीं जुटा पा रहे-
यहां रह रहे लोग खाना भी नहीं जुटा पा रहे हैं। उनके लिए पेट भरना तक मुश्किल हो गया है। अली के परिवार की स्थिति बहुत हद तक ऐसी ही है, जैसी बहुसंख्यक यमन आबादी की हालत है। अली के पिता खेतिहर मजदूर हैं। उनको बहुत कम मजदूरी मिलती है। लड़ाई शुरू होने के बाद अली की पढ़ाई भी छूट गई। अब वह भी मजदूरी करता है। युद्ध शुरू होने से पहले अली का परिवार हफ्ते में एक बार बीफ या फिर चिकन खाने के पैसे जुटा लेता था, लेकिन अब उनके लिए 2 समय का खाना जुटाना भी मुश्किल साबित हो रहा है। अली के भाई की हालत पिछले 2 साल से खराब है, लेकिन परिवार उसका इलाज नहीं कर पा रहा है।
22 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार-
यमन में ज्यादातर लोगों की हालत दयनीय हो गई है। पूरे यमन में करीब 22 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। यह आंकड़ा संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) ने जारी किया है। इसमें से करीब 4, 62, 000 बच्चे ऐसे हैं जो कि मुहन्नद की ही तरह गंभीर और जानलेवा कुपोषण से जूझ रहे हैं। यमन में यूनिसेफ के प्रवक्ता रजत मधोक ने कहा, 'जिंदगियों को बचाने की हमारी कोशिशें फंड की कमी और युद्धग्रस्त इलाकों के अंदर जा पाने की दिक्कत के कारण प्रभावित हो रही हैं।' युद्ध के कारण यमन की स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। अस्पतालों और क्लिनिक्स पर बमबारी की गई है। बाकी अस्पतालों पर युद्ध के कारण ताला लग गया है।
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