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प्रधानमंत्री मोदी ने साल के पहले ''मन की बात'' कार्यक्रम में कहीं ये बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल के पहले मन की बात कार्यक्रम की शुरूआत कल्पना चावला के लिए प्रकाश त्रिपाठी द्वारा लिखे गए पत्र से की।

प्रधानमंत्री मोदी ने साल के पहले

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल के पहले मन की बात कार्यक्रम की शुरूआत कल्पना चावला के लिए प्रकाश त्रिपाठी द्वारा लिखे गए पत्र से की। प्रधानमंत्री ने कहा, में प्रकाश त्रिपाठी का आभारी हूं जिन्होंने मुझे पत्र लिखकर कल्पना चावला के बारे में मन की बात करने को कहा। कल्पना चावला ने बहुत से लोगों को प्रेरित किया है, उनकी पुणयतिथि 1 फरवरी को है।

मोदी ने आगे कहा, महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, हर क्षेत्र में एक लीडर की तरह उभर रही है। आज ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जिसमें नारी शक्ति आगे बढ़कर झंडे गाड़ रही है।

मोदी जी ने तीन महिलाओं भावना कांत, मोहाना सिंह और अवनी चतुर्वेदी का जिक्र करते हुए कहा कि ये तीन महिलाएं फाइटर प्लेन उड़ाती हैं और अभी सुखोई-30 उड़ाने की ट्रेनिंग कर रही हैं।

मोदी ने मन की बात में आगे कहा, में मतुंगा रेलवे स्टेशन का जिक्र करना चाहूंगा जो देश का पहला महिला रेलवे स्टेशन है। जहां के सभी स्टाफ महिलाएं हैं, जो अपने आप में अदभुत है।

मोदी ने आगे कहा, हमारे देश में, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से, सामाजिक बुराइयों और बुरे प्रथाओं के खिलाफ अनन्त प्रयास हुए हैं। बिहार में सामाजिक बुराइयों को उखाड़ने के लिए 13,000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित विश्व की सबसे लंबी मानव श्रृंखला का गठन किया गया।

मोदी ने आगे कहा, मैं छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा की महिलाओं की सराहना करूंगा। यह एक माओवादी प्रभावित क्षेत्र है, लेकिन वहां महिलाएं ई-रिक्शा संचालित कर रही हैं। यह अवसर पैदा कर रहा है, यह क्षेत्र के चेहरे को बदल रहा है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है।

मोदी ने आगे कहा, मैसूर के दर्शन ने लिखा है कि वह अपने पिता के इलाज के लिए दवाओं पर प्रति माह 6000 रुपये का खर्च कर रहा था। उन्हें प्रधानमंत्री जन आयुध योजना के बारे में जानकारी नहीं थी। लेकिन अब उसने वहां से दवाओं की खरीद शुरू कर दी है और खर्च में 75% की कमी आई है।

मोदी ने आगे कहा, आपने अरविंद गुप्ता जी का नाम सुना होगा जिन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने सभी जीवन व्यतीत करने के लिए खिलौने बनाने के लिए खर्च किए। हमने उन लोगों को सम्मानित किया है जो बड़े शहरों में नहीं देखे जा सकते हैं लेकिन समाज के लिए परिवर्तनकारी काम कर चुके हैं।

मोदी ने आगे कहा, लक्ष्मीकुट्टी केरल के कालार में एक शिक्षिका है और अभी भी घने जंगलों के बीच एक आदिवासी पथ में ताड़ के पत्तों से बनी एक झोपड़ी में रहती है। वह अपनी स्मृति से 500 प्रकार की हर्बल दवाएं तैयार करती है उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मोदी ने आगे कहा, गांधीजी ने जो बात बताई हैं वो आज भी रिलिवेंट हैं। अगर हम संकल्प करें तो बापू के रास्ते पर चलें, जितना चल सकते हैं तो इससे बड़ी समझदारी कोई हो सकती है क्या।

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