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अलविदा 2018 / उत्तर प्रदेश में बेकाबू भीड़ ने इन जांबाज अफसरों को बनाया अपना शिकार

साल 2018 विदा होने वाला है, और नया साल 2019 आने वाला है। इसी वर्ष एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अलविदा 2018 / उत्तर प्रदेश में बेकाबू भीड़ ने इन जांबाज अफसरों को बनाया अपना शिकार

साल 2018 विदा होने वाला है, और नया साल 2019 आने वाला है। इसी वर्ष एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनता की रक्षा करने वाली पुलिस खुद अपनी ही रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही है। हाल ही में बुलंदशहर में के स्याना में गोकशी को लेकर हुई हिंसा में भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई। सुबोध कुमार सिंह के पहले यूपी में कई जांबाज अधिकारी भीड़ का शिकार हो चुके।

इन सभी हिंसाओं में भीड़ ने जांबाज अफसरों को अपना शिकार बनाया और उनके साथ मौजूद रहे पुलिस के अफसर व कर्मी भी साथी को अकेला छोड़कर घटना स्थल से भाग खड़े हुए। हम आपको उन अफसरों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिन्हें बेकाबू भीड़ ने ड्यूटी पर ही मार दिया।

बेकाबू भीड़ ने इन जांबाज अफसरों को बनाया अपना शिकार..

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह

तीन दिसंबर 2018 यानी सोमवार को उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के थाना स्याना में सूचना मिली कि ग्राम माहू के खेतों में कुछ गाय के अवशेष हैं। बताया गाया था कि इसकी जानकारी भूतपूर्व प्रधान रामकुमार ने दी थी।

इसके बाद प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह घटनास्थल पर पहुंचे और मौके का मुआयना किया। उन्होंने भड़े हुए ग्रामीणों से शांति की अपील करते हुए कहा कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सूचना मिलने के बाद एसडीएम और सीओ मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान आक्रोशित ग्रामीण अवशेष को ट्रैक्टर-ट्राली में डालकर चौकी चिंगरावटी में गए। और स्याना-गढ़ रोड को ब्लाक कर दिया।

इस कार्रवाई पर वहां के प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह, चौकी इंचार्ज, सीओ ने ग्रामीणों से बातचीत की लेकिन उत्तेजित ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त हो गया। इसके बाद दी भीड़ ने चौकी चिंगरावटी पर भारी पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने हिंसक भीड़ पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया। इसी दौरान सुबोध कुमार सिंह की गोली लगने से मौत हो गई।

डिप्टी एसपी जियाउल हक

साल 2013 में प्रतापगढ़ के कुंडा स्थित बलीपुर गांव में ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद गोलीबारी हुई, गोलीबारी में ग्राम प्रधान नन्हे यादव के भाई सुरेश की गोलीबारी में मौत हो गई।

गांव में गोलीबारी की सूचना मिलने पर सीओ कुंडा जिया उल हक को सात पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसी दौरान गुस्साई भीड़ ने उन्हें घेर लिया और गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके साथी जान बचाकर मौके से भाग खड़े हुए थे।

एएसपी मुकुल द्विवेदी व एसआई संतोष यादव

उत्तर प्रदेश के मथुरा में 2 जून 2016 को पुलिस की टीम जवाहर बाग में किए गए अवैध कब्जे को हटाने के लिए पहुंचे थे। जिन लोगों ने जवाहर बाग में कब्जा किया था उनके और पुलिस की टीम को बीच खूनी संघर्ष हो गया।

पुलिस की तुलना में कब्जेदारों की संख्या अधिक थी जिस कारण कब्जेदार पुलिस पर भारी पड़ गए। इसके बाद पुलिस कर्मी वहां से जान बचाकर भागने लगे। वहीं कब्जेदारों से मोर्चा लिये एएसपी मुकुल द्विवेदी व एसओ संतोष यादव को भीड़ ने घेरकर उनकी हत्या कर दी।

एसआई मनोज मिश्रा

उत्तर प्रदेश में बरेली में के फरीदपुर थाने में तैनात दारोगा मनोज मिश्रा 9 सितंबर 2015 की रात को गश्ती पर थे। गश्ती के दौरान उनकी नजर एक गाड़ी पर पड़ी जिसमें पशु (गायों) को तस्कर लादकर ले जा रहे थे।

जिसके बाद जब दारोगा मनोज मिश्रा ने तस्करों को रोकने की कोशिश की तो उन्होंने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। उनके साथी फायरिंग होती देख मौके से भाग निकले।

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