Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

अलविदा 2018/ इस साल दुनिया से रुखसत हो गए ये मशहूर भारतीय पत्रकार

साल 2018 में अनेक पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और कवि इस दुनिया से रुखसत हो गए। वरिष्ठ राजनेता, कवि और पत्रकार अटल बिहारी भी इस दुनिया को छोड़कर चले गए। उनकी मौत की खबर ने देश को हिला कर रख दिया था।

अलविदा 2018/ इस साल दुनिया से रुखसत हो गए ये मशहूर भारतीय पत्रकार

साल 2018 में अनेक पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और कवि इस दुनिया से रुखसत हो गए। वरिष्ठ राजनेता, कवि और पत्रकार अटल बिहारी भी इस दुनिया को छोड़कर चले गए। उनकी मौत की खबर ने देश को हिला कर रख दिया था। उनके निधन की खबर कई दिनों तक पूरे देश की मीडिया की सुर्खियां बनी रही। वहीं दुनियाभर के अनेक समाचार पत्रों के स्तंभ लेखक और वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का भी निधन हुआ। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या भी देश की मीडिया की सुर्खियां बनीं। आइए जानते हैं देश के उन छह मशहूर पत्रकारौं के बारे में, जो इस साल दुनिया को अलविदा कह गए।

अटल बिहारी वाजपेयी- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता बनने से पहले पत्रकार थे। वह देश-समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा से पत्रकारिता में आए थे। वाजपेयी ने राष्ट्रधर्म, पांच्यजन्य और वीर अर्जुन जैसी अनेक पत्र पत्रिकाओं के लिए संपादन का कार्य किया। 16 अगस्त 2018 को लंबी बीमारी के बाद राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। वे 93 साल के थे।
विष्णु खरे- हिंदी के प्रसिद्ध कवि पत्रकार विष्णु खरे का 19 सितंबर 2018 को निधन हुआ। खरे ने दैनिक इंदौर में उपसंपादक के पद पर रहे। इसके अलावा उन्होने दिल्ली, लखनऊ और जयपुर में नवभारत टाइम्स के संपादक के रुप में भी काम किया। खरे को हिंदी साहित्य में विश्व प्रसिद्ध रचनाओं के अनुवादक के रूप में भी याद किया जाता है। उन्होंने मशहूर ब्रिटिश कवि टीएस इलियट का अनुवाद किया और उस पुस्तक का नाम 'मरु प्रदेश और अन्य कविताएं' हैं। उनकी रचनाओं में काल और अवधि के दरमियान, खुद अपनी आंख से, पिछला बाकी, लालटेन जलाना, सब की आवाज के पर्दे में, आलोचना की पहली किताब आदि शामिल है।
कुलदीप नैयर - मशहूर पत्रकार कुलदीप नैयर की शांति कार्यकर्ता के अलावा एक पत्रकार के रुप में बड़ी छवि थी। वे भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई वर्षों तक कार्य करने के बाद वे यूएनआई, पीआईबी, 'द स्टैट्समैन', 'इण्डियन एक्सप्रेस' के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहे। वे 25 वर्षों तक 'द टाइम्स' लन्दन के संवाददाता भी रहे। डेक्कन हेराल्ड (बेंगलुरु), द डेली स्टार, द संडे गार्जियन, द न्यूज, द स्टेट्समैन, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून पाकिस्तान, डॉन पाकिस्तान, प्रभासाक्षी समेत 80 से अधिक समाचार पत्रों के लिए 14 भाषाओं में कॉलम और ऐप-एड लिखते थे। 23 अगस्त 2018 को उन्होने अंतिम सांस ली।
शुजात बुखारी- शुजात बुखारी भारतीय कश्मीरी पत्रकार और श्रीनगर से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र "राइजिंग कश्मीर" के प्रधान संपादक थे। बुखारी ने एशियाई सेंटर फॉर जर्नलिज्म के एक फ़ेलो के रूप में एटिनो डी मनीला विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया था और विश्व प्रेस संस्थान के फैलोशिप प्राप्तकर्ता थे। वे ईस्ट-वेस्ट सेंटर, हवाई के फ़ेलो भी रहे हैं। श्रीनगर में उनके ऑफिस के बाहर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। 14 जून 2018 को उनका निधन हो गया।
राजकिशोर- राजकिशोर का जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। सत्तर के दशक में कोलकाता से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘रविवार’ से उन्होंने अपने पत्रकारिता करिअर की शुरुआत की थी। वहां लंबे समय तक काम करने के बाद वह दिल्ली आ गए, जहां उन्होंने राजेंद्र माथुर और सुरेंद्र प्रताप सिंह के साथ नवभारत टाइम्स में लंबे समय तक काम किया। उन्होंने ‘दूसरा शनिवार’ मैगजीन का संपादन भी किया था. वे जनसत्ता, दैनिक जागरण समेत कई अखबारों में समसामयिक विषयों स्तम्भ भी लिखते रहे। कई दिनों से फेफड़ों में संक्रमण की बीमारी से जूझ रहे राजकिशोर का 4 जून 2018 को निधन हो गया।
नीलाभ मिश्र- नीलाभ मिश्र ने तीन दशक के पत्रकारिता करिअर की शुरुआत अपने गृहनगर पटना से बतौर रिपोर्टर नवभारत टाइम्स से की थी। इसके बाद वह जयपुर में न्यूज़ टाइम से बतौर संवाददाता जुड़े। साल 1998 में उन्होंने ईटीवी राजस्थान शुरू किया था। लीवर की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे नीलाभा का 24 फरवरी 2018 को निधन हो गया, तब वह नेशनल हेराल्ड व नवजीवन के प्रधान संपादक के पद कार्यरत थे।
Next Story
Share it
Top