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अलविदा 2018: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं पर दिए ये एतिहासिक फैसले

इस वर्ष महिलाएं जहां कई ऐसे मुद्दों को लेकर बहुत बेचैन रहीं, जो उनके अधिकारों और मान-सम्मान के लिए जरूरी हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसे निर्णय भी दिए, जो महिलाओं के पक्ष में रहे और उनकी आवाज मुखर हुई।

अलविदा 2018: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं पर दिए ये एतिहासिक फैसले
इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के मुद्दों पर कुछ ऐसे निर्णय भी दिए, जिससे उनकी आवाज मुखर हुई। बीते 28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एक ऐसा निर्णय लिया गया, जिनके महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के महिलाओं पर दिए गए एतिहासिक फैसलों पर एक नजर...
इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय था रजस्वला आयु (दस से पचास वर्ष) की महिलाओं को सबरीमाला (केरल) मंदिर में प्रवेश की अनुमति देना। सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक बहुमत निर्णय (4-1) आया कि 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के लिए भी सबरीमाला के कपाट खोल दिए गए हैं।
लेकिन परंपरा की दुहाई देते हुए राजनीतिक कारणों से जबरदस्त विरोध हुआ। मंदिर खुलने (17 से 20 अक्टूबर) के पहले दिन तो प्रदर्शनकारियों ने दर्शन की इच्छुक महिलाओं को पंबा पहाड़ी से जाने वाले वन मार्ग पर ही जबरन रोक दिया, पत्रकारों, विशेषकर महिला पत्रकारों, के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस असहाय नजर आई।
मंदिर में जाने का प्रयास करने वाली महिलाओं के घरों पर भी तोड़-फोड़ और पथराव किया गया यानी डराने, धमकाने का खुला खेल खेला गया। जब इस स्थिति के लिए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना हुई और यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का खुला उल्लंघन हो रहा है तो अगले दिन पुलिस अपनी निगरानी में दो महिलाओं को सबरीमाला पहाड़ी तक लेकर गई,
लेकिन ‘तंत्री’ (मुख्य पुजारी) ने धमकी दी कि अगर महिलाओं को गर्भगृह में ले जाने का प्रयास किया गया तो वह वह मंदिर को बंद कर देंगे। मजबूरन महिलाओं को बिना दर्शन के ही लौटना पड़ा। फिलहाल यही स्थिति बनी हुई है, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय की समीक्षा की मांग को स्वीकार कर लिया है।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बच्चों के बलात्कारियों को मृत्युदंड देने संबंधी जनहित याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी थी तो जवाब था, ‘मृत्युदंड हर चीज का उत्तर नहीं है।’
लेकिन तीन माह में ही सरकार ने अपना नजरिया बदल दिया और अपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 लाने का निर्णय लिया, जिसके तहत 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ बलात्कार करने पर न्यूनतम 20 वर्ष के कारावास या शेष जीवन के लिए जेल या मृत्युदंड का प्रावधान है।
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