Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

अलविदा 2018 : इन दो समाजसेवी महिलाओं ने रचा इतिहास, मिला ''पद्मश्री'' सम्मान

सरकार ने सुभाषिनी मिस्त्री की सेवा भावना का सम्मान करते हुए उन्हें इस साल पद्मश्री सम्मान से नवाजा। लक्ष्मीकुट्टी वह 500 तरह की हर्बल दवाइयां बना सकती हैं, लक्ष्मीकुट्टी ने अपनी इस काबिलियत से समाज सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी इस समाज सेवा के लिए इस साल उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया गया।

अलविदा 2018 : इन दो समाजसेवी महिलाओं ने रचा इतिहास, मिला

बीता साल जाने को है और कुछ दिनों में नया साल 2019 (New Year 2019) आने वाला है। 2017 में महिलाओं ने भारत का नाम विदेशों में भी रौशन किया उसी तरह भारतीय महिलाओं के द्वारा सफलता का परचम लहराने का यह सिलसिला 2018 में भी जारी रहा। इस साल आधी आबादी ने समाजसेवा में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और भारत का नाम रौशन किया, इन दो समाजसेवी महिलाओं ने जो नया मुकाम हासिल किया उसपर एक नजर...

एक तरफ महिलाएं फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं तो दूसरी तरफ अपने अथक परिश्रम से समाज की बेहतरी के लिए कार्य भी कर रही हैं। कुछ समय पूर्व तक सुभाषिनी मिस्त्री को कोई नहीं जानता था। वह बंगाल के ग्रामीण इलाके की एक साधारण महिला हैं।

उन्होंने सड़क के किनारे सब्जी बेचकर, एक-एक पैसा जोड़ा और अपनी जीवनभर की कमाई से गरीबों के लिए अस्पताल बनवाया। दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित इस अस्पताल में गरीबों का लगभग मुफ्त इलाज होता है।

सरकार ने सुभाषिनी मिस्त्री की सेवा भावना का सम्मान करते हुए उन्हें इस साल पद्मश्री सम्मान से नवाजा। सफेद सूती साड़ी और साधारण सी चप्पल पहन जब वे पद्मश्री सम्मान लेने पहुंचीं तो लोगों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया।

सुभाषिनी मिस्त्री की तरह ही असाधारण प्रतिभा की धनी हैं आदिवासी लक्ष्मीकुट्टी। वह 500 तरह की हर्बल दवाइयां बना सकती हैं, लक्ष्मीकुट्टी ने अपनी इस काबिलियत से समाज सेवा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी इस समाज सेवा के लिए इस साल उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया गया।

Share it
Top