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अलविदा 2018/ आजादी के 70 साल बाद खुला दोस्ती का कॉरिडोर

देश की आजादी के सत्तर साल बाद सिख समुदाय और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर 2018 महत्वपूर्ण साल रहा।

अलविदा 2018/ आजादी के 70 साल बाद खुला दोस्ती का कॉरिडोर

देश की आजादी के सत्तर साल बाद सिख समुदाय और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर 2018 महत्वपूर्ण साल रहा। 28 नवंबर को जब भारतीय सिख समुदाय के लिए करतारपुर की उम्मीदों का दरवाजा खुला तो यह खबर न केवल भारत और पाकिस्तान के मीडिया में छायी रही बल्कि दुनिया भर के मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। आइए करतारपुर साहिब कॉरिडोर के बारे में जानते हैं-

क्या है करतारपुर कॉरिडोर-
करतारपुर कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच एक प्रस्तावित बॉर्डर कॉरिडोर है जो भारत के पंजाब प्रांत के डेरा बाबा नानक साहिब और पाकिस्तान के पंजाब में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर के सिख श्रद्धालुओं को जोड़ता है। वर्तमान में योजना के तहत इस कॉरिडोर का उद्देश्य बिना वीजा के भारतीय सिखों को करतारपुर स्थित गुरुद्वारे के दर्शन के लिए अनुमति देना है। करतारपुर भारत-पाक सीमा से 4.7 किलोमीटर दूर है।


क्यों महत्वपूर्ण है यह कॉरिडोर-
करतारपुर साहिब सिक्खों के प्रथम धर्मगुरू गुरूनानक देव के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यहीं पर उन्होंने अपने जीवन का अंतिम और सबसे ज्यादा समय (करीब 18 वर्ष) बिताया। करतारपुर में ही उन्होंने अपनी अंतिम सांसे लीं। गुरुनानक देव की याद में यहां पर गुरुद्वारा का निर्माण कराया गया था। करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के लाहौर से 120 किमी दूर नारोवाल जिले में है जो पंजाब मे आता है। जहां पर गुरुद्ववारा है, वहीं पर 22 सितंबर 1539 को गुरुनानक देव ने अंतिम सांस ली थी।
कैसे चर्चा में आ गया करतारपुर कॉरिडोर-
पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के एक दावे के बाद करतारपुर साहिब का मुद्दा चर्चा में आ गया था। सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान गए थे। तब सिद्धू ने बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने उनसे कहा है कि पाकिस्तान करतारपुर साहिब गालियारा खोल सकता है। यह बात उन्हें वतन लौटने पर कही थी। इसके बाद इस मसले पर भारत सरकार की ओर से सहमति मिलने पर 28 नवंबर इस कॉरिडोर की नींव रखी गईं जिसमें भारत से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और हरसिमरत कौर बादल पहुंचे। इसके अलावा नवजोत सिंह सिद्धू भी पहुंचे।
क्या बोले दोनों देशों के प्रधानमंत्री-
इस कॉरिडोर को लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘क्या कभी किसी ने सोचा था कि बर्लिन की दीवार गिरेगी। हो सकता है गुरु नानक देवजी के आशीर्वाद से यह करतारपुर गलियारा महज एक गलियारा नहीं रह जायेगा बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच एक सेतु का काम करेगा।’
वहीं इस कॉरिडोर के उद्घाटन के मौके पर पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि हमें अपने अतीत से सीखना चाहिए और उसे छोड़ देने चाहिए। अतीत हमें यह सिखाता है कि हम अवश्य आगे बढ़ें। लेकिन, यहां पर हम आगे बढ़ते हैं और फिर पीछे आ जाते हैं। हमें अपने रिश्तों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता और मजबूत इच्छा शक्ति होनी चाहिए ताकि हम अच्छे पड़ोसी के साथ रह सके। आज, मैं यह कहता हूं कि मेरी पार्टी, मैं और हमारी सेना सभी एक साथ खड़े हैं। हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं।'
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