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भारत के साथ अमेरिका अहम रक्षा समझौता क्यों करना चाहता है मजबूत, ये है बड़ी वजह

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा समझौते से रक्षा तकनीकी में मजबूती आएगी।

भारत के साथ अमेरिका अहम रक्षा समझौता क्यों करना चाहता है मजबूत, ये है बड़ी वजह

अमेरिका भारत के साथ अपने रक्षा समझौते और रक्ष सहयोग को आगे बढ़ाने चाहता है जिससे कि दिलली के सीक्रेट कागजात आसानी से साझा किया जा सके। साथ ही एफ-16 और एफ-18 जैसे फाईटर प्लेन भारत को बेचने को परिशानी न हो सके।

ये बात अमेरिका के शीर्ष राजनायिक ने कही है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले महीने अमेरिका कांग्रेस से कही थी कि अमेरिका के एफ-16, एफ-18 फाईटर प्लेन को बेचने का पूरी तरह से स्पोर्ट करना है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव में इस प्रस्ताव में वह क्षमता है जिससे भारत के साथ अमेरिका के संबंधों मजबूती के साथ ओर आगे तक ले जाया सकेगा।

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बता दें कि शुक्रवार को दक्षिण और मिडिल एशिया मामलों के एक्टिंग असिस्टेंट सीक्रेटरी एलिस जी वेल्स ने बयान दिया कि ये एक अहम रक्षा समझौता है जिससे भारत और अमेरिका के बीच संबंध बढ़ेगे और अमेरिका के लिए सीक्रेट कागजात को साझा करने और एफ-16, एफ-18 जैसे फाईटर प्लेन्स को बेचना आसान हो जाएगा।

उन्होंने ये भी संभावना जताई है कि इस सहयोग से भारत ओर अमेरिका में रोजगार पैदा करने में आसानी हो जाएगी साथ ही दोंनो देशों के बीच रक्षा तकनीक में इजाफा भी देखने को मिलेगा।

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गौरतलब है कि अमेरिका दोनों तरफ से व्यापार को बढ़ाना चाहता है। नवंबर में महिन्द्रा की तरफ से मिशिगन में एक ऑटो प्लांट खोला जा रहा है।

नवंबर के आखिर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी ग्लोबल इंटरप्रेन्यूअरशिप सम्मिट में हिस्सा लेने जा रही है। इसमें एक साथ 1300 उद्यमी, निवेशक एकजुट होंगे और आपसी रिश्तों की गर्माहट के बीच उद्यमशीलता की भावना का प्रदर्शन होगा।

टिलरसन के साथ थे वेल्स

अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ भारत, पाकिस्तान, आफगानिस्तान दौरे पर वेल्स साथ ही थे। उसी दौरान वेल्स ने ये इस समझौते खुलासे के संकेत दे दिए थे उनेहोंने कहा कि पिछले दशक से हम शून्य से लेकर 15 बिलियन डॉलर की बिक्री तक पहुंचे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हम द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोनों देशों के बीच और ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं। इस वक्त दोनों देशों के बीच 115 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है जबकि 40 बिलियन डॉलर का निवेश है।

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वेल्स ने कहा कि टिलरसन ने अपने भारत दौरे पर इस बात की ओर अपना ध्यान केन्द्रित किया की कैसे क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा दिया जाए।
दक्षिण एशिया की रणनीति में हमने अफगानिस्तान को आर्थिक रुप से स्थायित्व पैदा करने के लिए भारत की भूमिका को अहमियत दी है।

2002 से भारत ने अफगानिस्तान में 2 बिलियन डॉलर का निवेश किया है और 2020 तक एक बिलियन और निवेश करने का वादा किया है।

भारत का 31 प्रांतों में प्रोजेक्ट चल रहा है और उन सभी जगहों पर प्रोजेक्ट्स की काफी अच्छी स्थिति है।

इस समझौते से भारत एक मजबूत रक्षा वाला देश बन जाएगा और अपने नापाक पड़ोसियों को सबक सीखने में और अधिक सक्षम दिखने लगेगा।

भारत ने अमेरिका के इस समझौते में अगर रूचि दिखाई तो अमेरिका और भारत के रिश्तों की दूर ओर नजदीक होगी।

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