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क्या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के किले को ढहाने में कामयाब होंगे संघ-भाजपा?

पश्चिम बंगाल में भाजपा की राह में सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं।

क्या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के किले को ढहाने में कामयाब होंगे संघ-भाजपा?
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पश्चिम बंगाल में 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही भाजपा और उसके सहयोगी संगठन अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं। लेकिन, उन्हें वो कामयाबी हासिल नहीं हो रही है, जिसकी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उम्मीद लगाए हैं। भाजपा की राह में सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं।
लेकिन भाजपा के लिए परेशानी यह है कि वो अब तक के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के दामन पर लगे शारदा और नारदा घोटाले के दागों को भुना नहीं पाई है। वोटरों पर इस मुद्दों का कोई असर नहीं हो रहा है। ऐसे में भाजपा को नई रणनीति को अपनाना होगा।

चुनौतीपूर्ण होंगे लोकसभा चुनाव

जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भाजपा और संघ परिवार के कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाया है। उससे साफ लगता है कि 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होने जा रहे हैं।
खास बात यह है कि ममता ने जिस तरह से विवेकानंद जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव कार्यक्रम का प्रसारण पश्चिम बंगाल में नहीं होने दिया, उससे भी उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए है। ममता भाजपा को किसी भी तरह से हल्के में नहीं ले रही है।

भाजपा को अपनानी होगी नई रणनीति

भाजपा और संघ के लिए सबसे बड़ी चुनौती तो यही है कि वो अपने बड़े नेताओं के साथ बड़े कार्यक्रम करने में नाकाम हो रहे हैं। जो होते भी हैं वो लोगों पर इतना असर नहीं डाल पा रहे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा को जमीनी स्तर पर भी पैठ जमाने में लोगों का साथ नहीं मिल रहा है।

या यूं कहें कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता अपनी दबंगई से भाजपा के हर कदम पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। भले ही इसके लिए हिंसा का ही सहारा लेना क्यों न पड़े। इस बीच अमित शाह ने भी साफ कर दिया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं को तृणमूल कांग्रेस के हमलों का जबाव देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

विपक्ष की कुर्सी हासिल कर सकती है भाजपा

सियासी पंडितों की मानें तो भाजपा भले ही निकट भविष्य में सत्ता हासिल नहीं कर पाए, लेकिन वो विपक्ष की कुर्सी तो हासिल करने का दमखम रखती है। इसकी वजह है कि बंगाल में वाममोर्चा दरकिनार होता जा रहा है। हाल के निकाय चुनाव में उसे सिर्फ एक ही सीट मिली है।
भाजपा की सबसे बड़ी कमजोरी प्रदेश में उसका कमजोर संगठन और मजबूत नेतृत्व का अभाव है। यह भी साफ है कि भाजपा का प्रदेश में जो भी जनाधार बढ़ा है वो वाममोर्चा के वोटबैंक का खिसकना है। इससे भाजपा को ज्यादा फायदा नहीं होने वाला है।

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