Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

रोहिंग्या मुसलमानों को देश में शरण नहीं देना चाहती सरकार, पर क्यों?

म्यांमार सरकार का कहना है कि ये बांग्लादेश से आए हुए मुस्लिम हैं और बंगाली हैं।

रोहिंग्या मुसलमानों को देश में शरण नहीं देना चाहती सरकार, पर क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर सरकार से उनकी योजनाओं पर जवाब मांगा है। भारत हमेशा से शर्णार्थियों को जगह देने के मामले में सालों से विन्रम रहा है। लेकिन रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर सरकार का नजरिया बदला हुआ है। आइए जानते हैं आखिर क्यों भारत इन्हें शरण देने से हिचक रहा है...

कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान

  • म्यांमार के 1982 नागरिकता कानून के अंतर्गत रोहिंग्या को 135 नृजातीय समूहों में भी शामिल नहीं किया गया है।
  • म्यांमार सरकार का कहना है कि ये बांग्लादेश से आए हुए मुस्लिम हैं और बंगाली हैं।
  • म्यांमार में रोहिंग्या शब्द पर पाबंदी है।

रोहिंग्या मुसलमानों की संख्या

  • म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं।
  • करीब 1.23 लाख 25 अगस्त तक बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं।
  • करीब 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत के जम्मू, हैदराबाद, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में मौजूद हैं।

भारत के पास नहीं है कोई शरणार्थी कानून

  • भारत ने शरणार्थियों को लेकर हुई भारत ने संयुक्त राष्ट्र की 1951 शरणार्थी संधी और 1967 में लाए गए प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
  • भारत अनौपचारिक तौर पर अलग-अलग मामलों में फैसला लेता है कि किस शरणार्थी को शरण देनी है और किसको नहीं।
  • भारत में शरण पाने वाले शरणार्थी को लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) दिया जाता है, जो हर साल रिन्यु करवाना होता है।
  • इस वीजा से शरणार्थी भारत में नौकरी, बैंकिंग और शिक्षा जैसी सुविधाओं को पाने के हकदार बन जाते हैं।

भारत इन शरणार्थियों के लिए अपने दरवाजे हमेशा खोले रहता है

  • तिब्बती, बांग्लादेश के चकमा शरणार्थी, अफगानी और श्रीलंका के तमिल भारत में शरण पाएं हुए हैं।
  • करीब 1 लाख तिब्बती भारत में हैं। ये यहां पर जमीन लीज पर ले सकते हैं और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी भी कर सकते हैं।
  • तमिल शरणार्थी अधिकतर तमिलनाडु में शरण लिए हुए हैं और इनके लिए तमिलनाडु राज्य सरकार विशेष मदद करती है।
  • 2016 में केंद्र सरकार ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बुद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत में कई खास सुविधाएं मुहैया करवाई हुई है। ये सभी यहां पर जमीन खरीद सकते हैं, ड्राइविंग लाइसेंस, पेन कार्ड, आधार कार्ड आदि बनावा सकते हैं।

क्यों रोहिंग्या मुसलमानों को शरण नहीं देना चाहती है सरकार

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि UNHCR का पेपर होने के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में नहीं रहने दिया जा सकता क्योंकि...

  • रोहिंग्या शरणार्थियों के आतंकी कनेक्शन हो सकते हैं।
  • ये न सिर्फ भारतीय नागरिकों के अधिकारों पर कब्जा कर रहे हैं बल्कि सुरक्षा के मद्देनजर भी खतरा पैदा कर सकते हैं।
  • रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
  • इसके पीछे की एक सोच यह भी है कि भारत के जनसांख्यिकीय पैटर्न सुरक्षित रखा जाए।

रोहिंग्यों को वापस भेजने में आ रही है ये दिक्कत

  • रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस बांग्लादेश और म्यांमार भेजने के लिए इन दोनों देश की सरकार से बात कर रहा है।
  • म्यांमार के कानून के अंतर्गत रोहिंग्या उनके नागरिक हैं ही नहीं। ऐसे में उसके पास उन्हें रखने का कोई जगह नहीं है।
Next Story
Top