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गुजरात-हिमाचल में सीएम पद के लिए अटकलें तेज, जाने कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब नतीजे आने से पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल की बैठक में होगा।

गुजरात-हिमाचल में सीएम पद के लिए अटकलें तेज, जाने कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद अब दोनों प्रदेशों में मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस पैदा हो गया है। हिमाचल में सीएम कैंडिडेट प्रेम कुमार धूमल की हार ने भाजपा को नया चेहरा लाने पर मजबूर किया है, लेकिन रोचक स्थिति गुजरात की है, जहां सीएम विजय रुपाणी का विकल्प तलाशा जा सकता है।

चुनाव से पहले माना जा रहा था कि जीतने के बाद रुपाणी ही प्रदेश के मुखिया बनेंगे, लेकिन नतीजे आने से पहले ही सीएम पद को लेकर उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल के बयान से यह संकेत मिला कि अपने सबसे मजबूत गढ़ में पार्टी इस बार नया चेहरा लाकर सरप्राइज दे सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुजरात और हिमाचल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

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मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर

दरअसल, मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब नतीजे आने से पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री का फैसला विधायक दल की बैठक में होगा। उनके इस बयान को उनकी मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी के रूप में देखा गया।

हालांकि नेता चुनने की औपचारिकता विधायक दल की बैठक में ही पूरी की जाती है, लेकिन चूंकि चुनाव रुपाणी के सीएम रहते लड़ा गया, ऐसे में यह माना गया कि जीत हासिल होने पर वही सीएम बनेंगे।

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सूत्र बता रहे हैं कि इस बार पार्टी शुरू से कोई मजबूत और प्रभावी चेहरा मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करना चाहती है। अटकलें यह भी हैं कि किसी बड़े नेता को केंद्र से गुजरात भेजा सकता है। हालांकि सोमवार को हुई संसदीय बर्ड की बैठक के बाद पार्टी की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला।

मोदी का विकल्प नहीं बना पाया कोई

गुजरात में भाजपा की मुश्किल यह है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद गुजरात में कोई उनका विकल्प नहीं बन पाया। मोदी ने आनंदीबेन पर भरोसा जताया था, लेकिन जिस तरह एक के बाद राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन हुए, उसे आनंदीबेन संभाल नहीं पाईं।

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खास तौर पर पटेल आंदोलन उनकी विदाई का सबब बना। उनके विकल्प के तौर पर लाए गए विजय रुपाणी भी कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। यही वजह रही कि चुनाव में भाजपा की हालत कमजोर नजर आने लगी। ऐसे में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमान संभाली और पार्टी की चुनावी नैया पार लगाई।

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