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समलैंगिकता क्या है, जानें क्यों होता है ऐसा और इसके लक्षण

ऑपोजिट सेक्स वालों की तरफ आकर्षित होने वालों को हेट्रोसेक्सुअल कहते हैं। इसी के उलट जब किसी पुरुष को पुरुष या किसी महिला को महिला से आकर्षण हो तो ऐसे लोगों को होमोसेक्सुअल/ लेस्बियन कहा जाता है। समलैंगिकता क्या है

समलैंगिकता क्या है, जानें क्यों होता है ऐसा और इसके लक्षण

समलैंगिकता क्या है

ऑपोजिट सेक्स वालों की तरफ आकर्षित होने वालों को हेट्रोसेक्सुअल कहते हैं। इसी के उलट जब किसी पुरुष को पुरुष या किसी महिला को महिला से आकर्षण हो तो ऐसे लोगों को समलैंगिक/ लेस्बियन कहा जाता है। ऐसे लोग सेम सेक्स के लोग की तरफ अट्रैक्ट होते हैं।

समलैंगिकता v/s बाई-सेक्सुअल

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो पुरुषों और महिलाओं दोनों की तरफ आकर्षित होते हैं वो हेट्रोसेक्सुअल भी होते हैं और होमोसेक्सुअल भी। ऐसे लोगं को बाई-सेक्सुअल भी कहा जाता है।

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उदाहरण के तौर पर किसी को खाने में वेज पसंद होता है, तो किसी को नॉनवेज। एक इमसान ऐसा भी होता है, जिसे वेज और नॉनवेज दोनों पसंद होता है।

इसी तरह से ऑपोजिट सेक्स में किसी को सेम सेक्स वाले लोग पसंद हैं तो किसी को दोनों सेक्स के लोग। ये तीनों तरह के ही लोग सामान्य होते हैं।

क्यों होता है कोई समलैंगिक

आधुनिक विज्ञान कहता है कि समलैंगिकता की प्रवृत्ति जन्मजात होती है। इसमें उस इंसान का कोई कसूर नहीं होता, न ही उनके पैरेंट्स का।

समलैंगिकता के लक्षण

ऐसे व्यक्ति जब भी सेक्स से जुड़ी बातें सोचते हैं तो उनके ख्याल में समान सेक्स वाला ही लड़का या लड़की आती है। सिर्फ ख्यालों में ही नहीं सपनों में भी।

क्या समलैंगिकता व्यक्ति में बदलाव है मुमकिन

ये लक्षण जन्मजात होने के कारण इसमें बदलाव लाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। ऐसे इंसाने में बदलाव तभी हो सकता है जब वो इंसान खुद बदलाव चाहे, वो भी बिना किसी दबाव के। लेकिन किसी तरह के दबाव में बदलाव होना बेमानी सी बात है।

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  • कई बार मन की कोई बीमारी की वजह से भी किसी किसी इंसान में समलैंगिकता के लक्षण कुछ समय के लिए आ जाते हैं।
  • बीमारी ठीक हो जाने के बाद वो इंसान फिर से हेट्रोसेक्सुअल हो जाता है।
  • एक होमोसैक्सुअल या समलैंगिक व्यक्ति अपनी कामेच्छा के हिसाब से अपने आप को संतुष्ट कर लेता है।
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