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Delhi Boss: दिल्ली के उपराज्यपाल और सीएम के क्या हैं अधिकार, जानें पूरा मामला

दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के फैसले में कहा गया कि दिल्ली का संवैधानिक अधिकार उपराज्यपाल के पास हैं।

Delhi Boss: दिल्ली के उपराज्यपाल और सीएम के क्या हैं अधिकार, जानें पूरा मामला
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दिल्ली में अधिकारों को लेकर उपराज्यपाल अनिल बैजल और सीएम अरविंद केजरीवाल के भविष्य का सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कर दिया है। एलजी और दिल्ली सरकार के दोनों के काम को चलाने के लिए एक साथ काम करना होगा। एलजी मनमानी नहीं कर सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के फैसले में कहा गया कि दिल्ली का संवैधानिक अधिकार उपराज्यपाल के पास हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।

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सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 2 नवंबर से इस मामले की सुनवाई शुरू की। बता दें कि महज 15 सुनवाई में पूरे मामले को सुनने के बाद 6 दिसंबर 2017 को इस ऐतिहासिक फैसले को कोर्ट ने सुरक्षित रख लिया था।

केजरीवाल ने लगाए ये आरोप

सीएम अरविंद केजरीवाल हमेशा एलजी पर फाइलें अटकाने का आरोप लगाते रहते हैं। एलजी ने दिल्ली सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं को खारिज कर दिया। जिसके बाद वो और उनके तीन कैबिनेट मंत्री एलजी के हाउस में धरने पर बैठ गए। जिसके बाद एलजी और केजरीवाल के बीच बातचीत हुई और धरना खत्म हुआ। बता दें अरविंद केजरीवाल की तरफ से कोर्ट में कई तर्क दिए गए हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि उपराज्यपाल उनके काम के बीच में दखल देते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट दे चुका है फैसला

दिल्ली में मालिकाना हक को लेकर हाईकोर्ट पहले ही उपराज्यपाल के पक्ष में फैसला सुना सकता है। दो साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 फैसला सुनाते हुए कहा कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली सरकार एलजी की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती। इस फैसले का दिल्ली सरकार ने काफी विरोध किया।

ये हैं उपराज्यपाल और सीएम के अधिकार

दिल्ली में कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों को लेकर हमेशा से ही तनातनी रही है। लेकिन कई सरकारों के दौरान सीएम और उपराज्यपाल के बीच तालमेल से ही सरकार चलती रही हैं।

1. संविधान के मुताबिक, दिल्ली के उपराज्यपाल को काफी अधिक शक्तियां प्राप्त हैं। एक तरह से दिल्ली में सरकार चलाने का जिम्मा उन्ही के अधिकार क्षेत्र में आता है।

2. उपराज्यपाल को जीएनसीटीडी एक्ट, 1991 और ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स, 1993 के प्रावधानों में ये अधिकार और शक्तियां दी गई है।

3. दिल्ली के उपराज्यपाल संवैधानिक प्रमुख के साथ-साथ प्रशासक अधिकार भी हैं। देश के अन्य राज्यों के राज्यपालों से ज्यादा शक्तियां प्राप्त हैं।

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4. ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल 1993 के नियम 57 के मुताबिक, मुख्य सचिव और दिल्ली सरकार के सभी विभाग इन नियमों का ध्यान से पालन करेंगे।

5. मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, विधि सचिव, गृह सचिव की नियुक्ति उपराज्यपाल के जरिए केंद्र करता है। ऐसे में सीएम के पास सिर्फ नाम भेजने का अधिकार है।

6. दिल्ली कैबिनेट के किसी भी बिल को तब तक लागू नहीं किया जाएगा जबतक की वो मामला केंद्र के पास नहीं पहुंचगा। उसके बाद उपराज्यपाल उस पर मुहर लगाएंगे। ऐसे में सीएम के पास सिर्फ मुहर लगाकर फाइल को आगे बढ़ाना होगा।

7. यदि सीएम कोई फैसला लेते हैं और उपराज्यपाल को वो फैसला पसंद नहीं आया तो सीएम को उसके बारे में दोबारा सोचना होगा। साफ है कि सीएम अपनी मर्जी के कोई भी फैसला नहीं ले सकते हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि आप सरकार की तरफ से पी चिदंबरम, गोपाल सुब्रह्मण्यम, राजीव धवन और इंदिरा जयसिंह जैसे नामी वकीलों ने कोर्ट में कई दलीलें रखीं है। साफ है कि अगर दिल्ली में सरकार चलानी है तो सीएम और उपराज्यपाल को मिल जुलकर काम करना होगा।

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