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भारतीय नौसेना में शामिल हुआ सबसे बड़ा वॉरशिप ‘INS चेन्‍नै’

रक्षा मंत्री ने इस अवसर को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।

भारतीय नौसेना में शामिल हुआ सबसे बड़ा वॉरशिप ‘INS चेन्‍नै’
मुंबई. देश के सबसे बड़े मिसाइल नाशक जहाजों में से एक 'आईएनएस चेन्नै' को आज भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया। केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को मझगांव डाकयॉर्ड में 60% स्वदेशी बनावट वाले वॉरशिप को देश को सौंपा। इसे नौसेना में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया। रक्षा मंत्री ने इस अवसर को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल सुनील लांबा भी इस मौके पर मौजूद थे।
अडवांस तकनीक का जहाज
यह कोलकाता क्लास का सबसे अडवांस तकनीक का जहाज है। इस क्लास के पहले जहाज आईएनएस कोलकाता को 2014 में नौसेना में शामिल किया गया था, जबकि आईएनएस कोच्चि को पिछले साल सितंबर में नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस चेन्नै को शामिल किए जाने के साथ ही नौसेना का प्रॉजेक्ट 15ए खत्म हो गया है। इस जहाज को पश्चिमी नौसेना कमान के कंट्रोल में रखा जाएगा।
स्वदेशी डिजाइन
स्वदेशी डिजाइन वाले इस जहाज का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक में किया गया है। 164 मीटर लंबाई का यह जहाज 7500 टन का है। सुपरसॉनिक सरफेस टु सरफेस ब्रह्मोस और सरफेस टु एयर बराक 8 मिसाइलों से लैस इस शिप से दो हेलिकॉप्टर ऑपरेट कर सकते हैं। इसमें स्वदेशी पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर भी हैं।
दुश्मनों के रडार को देगी चकमा
‘कवच’ चैफ डिकोय सिस्टम से लैस यह वॉरशिप दुश्मन के राडार को चकमा देने के साथ दो हेलिकाप्टर भी ढो सकता है। इसके साथ ही पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन से समुद्र में मुकाबला करने के लिए भारत की ताकत बढ़ गई है। दुश्मन की मिसाइलों से बचाने के लिए इसमें "कवच" सिस्टम लगाया गया है। टॉरपीडो से बचाने के लिए इसमें "मारीच" सिस्टम है। इसके किचन में नई मशीनरी से 800 रोटियां प्रति घंटे तैयार हो सकती हैं। साथ ही इसमें नौसैनिकों के लिए बेहतर स्पेस का भी इंतजाम किया गया है।
नौसेना का प्रॉजेक्ट 15ए खत्म
इस क्लास के पहले जहाज आईएनएस कोलकाता को 2014 में नौसेना में शामिल किया गया था, जबकि - आईएनएस कोच्चि को पिछले साल सितंबर में नौसेना में शामिल किया गया। आईएनएस चेन्नई को शामिल किए जाने के साथ ही नौसेना का प्रॉजेक्ट 15ए खत्म हो गया है। इस जहाज को पश्चिमी नौसेना कमान के कंट्रोल में रखा जाएगा। इस श्रेणी के पहले पोत का नाम आईएनएस कोलकाता था और इसका जलावतरण 16 अगस्त 2014 को किया गया था। इसके बाद आईएनएस कोच्चि का जलावतरण 30 सितंबर 2015 में किया गया।
तीन जंगी जहाज में से यह आखिरी जहाज
कोलकाता श्रेणी (परियोजना-15-ए) के तहत बनने वाले तीन जंगी जहाज में से यह आखिरी जहाज है। इससे पहले कोलकाता सीरीज का ‘आईएनएस कोलकाता’ 16 अगस्त 2014 में और ‘आईएनएस कोच्चि’ 30 सितंबर 2015 में नेवी में शामिल हो चुके हैं। इन तीनों वॉरशिप की कुल लागत 11,500 करोड़ रुपये के आसपास रही है।
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