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पुतिन की भारत यात्रा: 40 हजार करोड़ की डिफेंस डील पर हो सकते हस्ताक्षर, जानिए क्या हैं S-400 सिस्टम

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19वें भारत-रूस शिखर सम्मलेन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान भारत और रूस के बीच 40000 करोड़ के एंटी मिसाइल सिस्टम एस-400 के सौदे पर मुहर लग सकती है।

पुतिन की भारत यात्रा: 40 हजार करोड़ की डिफेंस डील पर हो सकते हस्ताक्षर, जानिए क्या हैं S-400 सिस्टम
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19वें भारत-रूस शिखर सम्मलेन में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर को अपने दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं।

अमेरिका द्वारा भारत पर बनाए जा रहे दबाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इस दौरान भारत और रूस के बीच लगभग 40000 करोड़ के एंटी मिसाइल सिस्टम एस-400 के साथ अन्य बड़े रक्षा सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है।

भारत-रूस शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच होने वाल उच्चतम स्तर का आधिकारिक सम्मलेन है। ये सम्मलेन एक बार भारत और एक बार रूस में आयोजित किया जाता हैं। भारत रुस के बीच पिछला शिखर सम्मेलन 2017 में सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित किया गया था।

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इस सम्मलेन की शुरुआत साल 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी द्वारा की गई थी। नई दिल्ली में इस सम्मलेन के उद्घाटन समारोह में रुसी राष्ट्रपति पुतिन ने भी भाग लिया था।

बदलते वैश्विक कुटनीतिक संबंधों के बीच भारत द्वारा संतुलित तरीके से विश्व की महाशक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने की कोशिशें जा रही हैं। भारत के लिए अमेरिका और रुस जैसी दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों के साथ संबंधों को बचाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विगत 4 सालों में अमेरिका के साथ आर्थिक तथा रक्षा संबंधों को बढ़ाते समय यह विशेष ध्यान रखा गया कि कहीं से भी भारत किसी समूह का हिस्सा न दिखे और न ही हमारे पुराने सहयोगी मित्र देशों से संबंध खराब हों।

भारत को दक्षिण एशिया में अपने हितों की भी चिंता सता रही है जिसमे रूस के साथ ईरान से भी अपने दीर्घकालिक हितों की रक्षा करनी है, भारत जनता है यदि यहां किसी भी प्रकार की चूक पाकिस्तान, ईरान, चीन और रूस को एक अनचाहे गठजोड़ में बदल सकता है और भारत के लिए यह आदर्श स्थिति तो बिलकुल नहीं होगी।

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क्या है एस-400 मिसाइल सिस्टम?

एस-400 इस समय दुनिया का सबसे उन्नत एंटी मिसाइल सिस्टम है जो अमेरिका के एफ 35 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के साथ विश्व के किसी भी प्रकार के उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स को मार गिराने की ताकत रखता है।

यह मिसाइल सिस्टम लोंग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है जो 400 किमी तक की दुरी से से आ रहे मिसाइलों तथा ड्रोन को मार गिरा सकता है।

क्यों जरूरी है यह हमारे लिए?

एस-400 सिस्टम के भारतीय सेना में जुड़ जाने से भारत की सैन्य ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। भारत इससे चीन तथा पकिस्तान की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों से अपना बचाव कर सकेगा। हालांकि चीन पहले ही रूस से एस-400 सिस्टम खरीद कर अपनी सेना में शामिल कर चुका है।

इस अहम सौदे का एलान साल 2016 में गोवा में हुई ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रुसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच किया गया था।

भारत की बदती रक्षा जरूरतों के बड़े बाज़ार को देखते हुए अमेरिका नहीं चाहता कि एस-400 सिस्टम को रूस से खरीदे। इसलिए अमेरिका भारत को अपने नए व्यापारिक विधेयक CAATSA के तहत प्रतिबंधों की धमकी से डरा भी रहा है।

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