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''किंगफिशर'' पक्षी की तरह फुर्र हो गए माल्‍या: बॉम्‍बे हाइकोर्ट

कोर्ट ने सर्विस टैक्‍स डिपार्टमेंट की तरफ से दाखिल एक अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्‍पणी की।

नई दिल्ली. बैंकों का हजारों करोड़ रुपया नहीं चुका रहे और भागकर ब्रिटेन में रह रहे कारोबारी विजय माल्‍या के खिलाफ बॉम्‍बे हाइकोर्ट ने टिप्‍पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि माल्‍या ने बहुत ही कुशलता के साथ अपनी कंपनी का नाम 'किंगफिशर' रखा क्‍योंकि इस नाम की चिड़िया की भांति वह भी सीमाओं की परवाह किए बिना फुर्र हो गए।

बॉम्‍बे हाइकोर्ट के जस्टिस एससी धर्माधिकारी और बीपी कोलाबवाला की डिविजन बेंच ने सोमवार को सर्विस टैक्‍स डिपार्टमेंट की तरफ से दाखिल एक अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्‍पणी की। इस दौरान कोर्ट ने डिपार्टमेंट की तरफ से दाखिल उस याचिका पर भी सुनवाई की जिसमें माल्‍या के प्राइवेट एयरक्राफ्ट की नीलामी वापस लेने की मांग की गई थी।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान जस्टिस धर्माधिकारी ने कहा, 'क्‍या किसी को मालूम है कि उन्‍होंने (माल्‍या ने) अपनी कंपनी का नाम 'किंगफिशर' क्‍यों रखा? इतिहास में किसी ने भी अपनी कंपनी का इतना सटीक नाम नहीं रखा। चूंकि किंगफिशर एक चिड़िया है जो उड़कर कहीं भी जा सकती है...उसे किसी भी सीमा की परवाह नहीं...कोई भी सीमा उसे रोक नहीं सकती। ठीक उसी तरह उन्‍हें (माल्‍या) भी कोई रोक नहीं सका।'

हाइकोर्ट ने सर्विस टैक्‍स डिपार्टमेंट की तरफ से दाखिल वह अपील भी सुनवाई के लिए स्‍वीकार कर ली जिसमें डेट रिकवरी ट्राइब्‍यूनल द्वारा 2014 में पास ऑर्डर को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस बारे में बाद में सुनवाई करने की बात कही। टैक्‍स डिपार्टमेंट की याचिका के मुताबिक, बतौर सर्विस टैक्‍स माल्‍या पर 32.68 करोड़ रुपये का बकाया है। यह टैक्‍स अप्रैल 2011 से सितंबर 2012 के बीच किंगफिशर एयरलाइंस के पैसेंजरों को टिकट बेचने से बनता है। इसके अलावा माल्‍या पर डिपार्टमेंट का कुल बकाया 532 करोड़ रुपये है।
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