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मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, विजय माल्या की जल्द होगी घर वापसी

ब्रिटेन की अदालत ने विजय माल्या को करारा झटका देते हुए उन्हें भारत के हवाले करने की अनुमति दे दी। इस समय ब्रिटेन में रह रहे 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर हैं।

मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी, विजय माल्या की जल्द होगी घर वापसी

कानून से बच कर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को सोमवार को ब्रिटेन की अदालत ने करारा झटका देते हुए उन्हें भारत के हवाले करने की अनुमति दे दी। इस समय ब्रिटेन में रह रहे 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर हैं।

विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपए बकाया है। उन पर किंगफिशर एयरलाइन के लिए लिए बैंकों से लिए गए कर्ज में हेराफेरी और और मनी लांडरिंग का आरोप है। यह एयरलाइन बंद हो चुकी है।

ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत की मुख्य मजिस्ट्रेट जज एम्मा आबुथनॉट माल्या के भारत प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी ताकि उनके खिलाफ भारतीय जांच एजेंसियों केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के आधार पर मुकदमा चलाया जा सके।

विजय माल्या को भारत को सौंपने की अर्जी को माल्या ने चुनौती दी थी और यह बहुचर्चित मामला वहां करीब एक साल चला। माल्या ने दलील दी थी कि उन्होंने बैंकों के साथ कोई हेराफेरी या चोरी नहीं की है। उन्होंने दिन में कहा था था भारतीय बैंकों को मूल राशि लौटाने की पेशकश ‘फर्जी' नहीं है।

माल्या ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा, कर्ज निपटाने की मेरी पेशकश कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष की गई है। प्रत्यर्पण मुकदमे से उसका संबंध नहीं है। कोई फर्जी पेशकश कर के न्यायालय की अवमानना नहीं कर सकता। ईडी ने संपत्तियां कुर्क की हैं। वे फर्जी संपत्तियां नहीं हैं।

विजय माल्या ने कहा कि उनकी संपत्तियों का मूल्य इतना है जिससे वह सभी का भुगतान कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान इसी पर है। उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम इस फैसले की समीक्षा के बाद आगे कदम उठाएगी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष की गई पेशकश के बारे में माल्या ने कहा कि यदि निपटान की अनुमति दी जाती है तो सबसे पहले किंगफिशर के कर्मचारियों का भुगतान किया जाना चाहिए। यह मामला पिछले साल चार दिसंबर को मजिस्ट्रेट अदालत में शुरू हुआ था। इस मामले की सुनवाई के लिए शुरू में सात दिन रखे गए थे, लेकिन सुनवाई इससे कहीं अधिक चली।

माल्या बोले-मामला राजनीति से प्रेरित

माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है। वह कर्ज का 100फीसदी मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।

सीबीआई की दलील

00 सीबीआई ने ब्रिटेन की अदालत को बताया, माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है। सीबीआई ने यूके की अदालत के फैसले का स्वागत किया। कहा- हमें उम्मीद है कि माल्या को जल्द भारत लाया जाएगा और हम उसके खिलाफ मामलों में नतीजे पर पहुंचेंगे।

आगे क्या

- यूके की लीगल एक्सपर्ट पावनी रेड्डी के मुताबिक, यूके सरकार अदालत के फैसले से संतुष्ट होती है तो वह माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करेगी। अब माल्या के पास 14 दिन में हाईकोर्ट में अपील का अधिकार होगा।

- माल्या ने अगर प्रत्यर्पण के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की तो यूके की सरकार के आदेश जारी करने के 28 दिन में उसका प्रत्यर्पण किया जाएगा।

माल्या के लिए बैरक तैयार

किंगफिशर एयरलाइन्स का पूर्व कर्ताधर्ता 62 वर्षीय माल्या पिछले साल अप्रैल में एक प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर है। जेल के एक अधिकारी ने कहा कि अगर माल्या को प्रत्यर्पित किया जाता है तो उसे जेल परिसर के अंदर दो-मंजिला इमारत में स्थित एक उच्च सुरक्षा वाली बैरक में रखा जाएगा। जेल के इसी हिस्से में 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को रखा गया था।

इधर, मिशेल की हिरासत पांच और दिन बढ़ाई

दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा मामले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल की हिरासत अवधि को पांच दिन और बढ़ा दिया ताकि सीबीआई हिरासत में उससे पूछताछ कर सके। पहले दी गई पांच दिन की सीबीआई रिमांड खत्म होने पर उसे विशेष सीबीआई न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष पेश किया गया था।

जांच एजेंसी ने हिरासत में पूछताछ के लिये अदालत से यह कहते हुए मिशेल की नौ दिनों की रिमांड मांगी थी कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा। मिशेल के वकील ने हिरासत बढ़ाने की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि अब तक उन्हें कोई भी संदिग्ध साक्ष्य नहीं दिखाया गया है। इस बीच मिशेल ने जमानत के लिये पूर्व में दी गई अपनी याचिका को वापस ले लिया और नए सिरे से विस्तृत जमानत याचिका दायर की।

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