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विजय दिवस / जब पाक एयरफोर्स ने अपने ही नौसेनिकों पर बम बरसा दिए, भारत की रणनीति हुई सफल

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Dec 13 2018 5:28PM IST
विजय दिवस / जब पाक एयरफोर्स ने अपने ही नौसेनिकों पर बम बरसा दिए, भारत की रणनीति हुई सफल
विजय दिवस (Vijay Diwas) यानी 1971 भारत-पाक युद्ध में भारत की जीत का जश्न। 16 दिसंबर 1971 को भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) को पश्चिमी पाकिस्तान (West Pakistan) से अलग कर दिया था। पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बांग्लादेश (Bangladesh) बन चुका था।
 
मात्र 13 दिन की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को वो पटखनी दी कि आज भी सिर उठाने से डरता है। उस युद्ध में भारतीय थल सेना (Indian Army) के साथ ही जल सेना (Indian Navy) ने भी अपना बेहतरीन योगदान दिया था। आज हम आपको बता रहे हैं इंडियन नेवी ने आखिर कैसे इस युद्ध को पूरी तरह बदल दिया।
 
1965 भारत-पाक युद्ध में भारत ने पाकिस्तान की जल सेना की हालत खराब कर दी थी। पाकिस्तानी नौसेना (Pakistan Navy) 1971 के भारत-पाक युद्ध के लिए तैयार नहीं थी। इस बात को पाकिस्तानी नौसेना मुख्यालय में बैठे बड़े अफसर अच्छी तरह जानते थे।
 

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उन्हें पता था कि अगर इस बार वो युद्ध में उतरे तो पाकिस्तानी नौसेना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वो ये भी जानते थे कि नौसेना लड़ने लायक नहीं है साथ ही वह भारतीय नौसेना के हमले से सुरक्षा करने के काबिल भी नहीं है। 
 

 पाकिस्तान ने डुबोया भारत का जहाज 

भारतीय नौसेना ने पश्चिम कमांड के वाइस एडमिरल सुरेंद्र नाथ कोहली (Surendra Nath Kohli) के नेतृत्व में 4-5 दिसंबर की रात को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर हमला बोल दिया। पाकिस्तानी इस हमले के लिए तैयार नहीं थे।

इस हमले में सोवियत निर्मित ओसा मिसाइल, पाकिस्तानी नौसेना के ध्वंसक पीएनएस खायबर और माइनस्वीपर पीएनएस मुहाफिज को डुबो दिया। वहीं पाकिस्तानी नौसेना की पीएनएस शाहजहां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पाकिस्तान की नौसेना ने बौखलाकर पंडुब्बियों से भारतीय युद्धपोतों को खोजने का अभियान शुरू किया।

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लेकिन वह खाली हाथ ही रह गए। बताया जाता है कि इस हमले में पाकिस्तान के 720 नौसैनिक या तो हताहत हो गए या लापता हो गए। अब पाकिस्तान के लिए 1971 युद्ध में बने रहना और मुश्किल हो गया। पाकिस्तान ने पनडुब्बी से हमला करके INS खुकरी को गुजरात बंदरगाह में डुबो दिया। द्वित्तीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला पनडुब्बी हमला था।   

 भारत ने किया पलटवार 

INS खुकरी के हमले से भरतीय नौसेना घायल शेर हो गया। जिसके बाद नौसेना ने 6-7 दिसंबर की रात कराची हार्बर पर फिर से एक और हमला किया। भारतीय नौसेना ने ओसा मिसाइलों से कराची हार्बर पर खड़े कई जहाजों को उड़ा दिया। उसमें तीन व्यापारी बेड़े और एक विदेशी जहाज शामिल था।
 
पाकिस्तान का तेल भंडार तो इस तरह नष्ट हुआ कि वह हफ्ते भर तक धुआं छोड़ता रहा। पाकिस्तानी वायुसेना (Pakistan Air Force) के पास ऐसे जहाज नहीं थे जो रात में हमला कर सके इस लिए पाक की वायुसेना ने कोई हलचल नहीं दिखाई।
 
अगले दिन भी पाकिस्तान को यह संदेह बना रहा कि भारतीय पंडुब्बियां समुद्र में हैं। इसी चक्कर में पाकिस्तान की वायुसेना ने अपने ही पीएनएस ज़ुल्फ़ीकार युद्धपोत पर हमला कर दिया। जिससे उसे गंभीर क्षति हुई। 
 
 

 INS विक्रांत को डुबोने आई गाजी खुद डूब गई 

इन हमलों के बाद भारतीय नौसेना ने पूर्वी पाकिस्तान में अपना ध्यान देना शुरू किया। नौसेना ने बंगाल की खाड़ी में एक अवरोध बनाकर पश्चिमी पाकिस्तान से पूरी तरह अलग कर दिया। 4 
दिसंबर को ही भारतीय नौसेना ने INS विक्रांत (Ins Vikrant) को तैनात कर रखा था।
 
आईएनएस विक्रांत पर तैनात लड़ाकू विमानों ने पूर्वी पाकिस्तान के तटीय इलाकों में बम बरसाए जिसमें पश्चिमी पाकिस्तान के सैनिकों को काफी नुकसान हुआ। बदले की कार्रवाई से पाकिस्तान ने INS विक्रांत को डुबोने के लिए PNS गाजी को भेजा। जो संदेहजनक परिस्थितियों में विशाखापट्टनम के करीब डूब गई।
 
कुछ लोगों का मानना है कि भारतीय खूफिया विभाग ने उसे डुबो दिया। अब पाकिस्तान को लगने लगा था कि वह अब नहीं जीत पाएगा। 16 दिसंबर 1971 को आखिरकार पाकिस्तान के 93 हजार नौसेनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। 

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-Tags:#Vijay Diwas#Vijay Diwas 2018#India#Pakistan#Bangladesh

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