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विजय दिवस / पाक की मदद न कर पाने से झल्लाए अमेरिका ने इंदिरा को गाली दे दी...

विजय दिवस (Vijay Diwas) के रूप में भारत 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध की जीत का जश्न मनाता आ रहा है। इसी युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान एक अलग देश बांग्लादेश बन गया। लेकिन जितना आसान यह पढ़ने और सुनने में लगता है उतना आसान यह युद्ध था नहीं। आयरन लेडी कही जाने वाली इंदिरा गांधीं (Indira Gandhi) तत्कालीन प्रधानमंत्री थीं। उन्हें उस समय कई सारे अंतरराष्ट्रीय दबावों को झेलना पड़ा है। हम आपको बता रहे हैं कि इंदिरा ने कैसे अमेरिका के दबावों की परवाह नहीं की और पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया।

विजय दिवस / पाक की मदद न कर पाने से झल्लाए अमेरिका ने इंदिरा को गाली दे दी...
विजय दिवस (Vijay Diwas) के रूप में भारत 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध की जीत का जश्न मनाता आ रहा है। इसी युद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान एक अलग देश बांग्लादेश बन गया। लेकिन जितना आसान यह पढ़ने और सुनने में लगता है उतना आसान यह युद्ध था नहीं। आयरन लेडी कही जाने वाली इंदिरा गांधीं (Indira Gandhi) तत्कालीन प्रधानमंत्री थीं। उन्हें उस समय कई सारे अंतरराष्ट्रीय दबावों को झेलना पड़ा है। हम आपको बता रहे हैं कि इंदिरा ने कैसे अमेरिका के दबावों की परवाह नहीं की और पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इंदिरा को कहा 'बिच'

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का यह बेहद महत्वपूर्ण वाकिया है। पश्चिमी पाकिस्तान लगातार पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में तानाशाही रवैया अपनाते जा रहा था। जिसके कारण
हजारों की संख्या में शरणार्थी हर रोज भारत की सीम में प्रवेश कर रहे थे।
समस्या बढ़ती जा रही थी। लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा था। अमेरिका ने पाकिस्तान के सिर पर हाथ रख रखा था। लेकिन जब इंदिरा से बर्दाश्त नहीं हुआ तो उन्होंने ठान लिया कि पाकिस्तान को सबक सिखाना ही है। भारतीय सेना ने हस्तक्षेप करना शुरू किया जिसका रोना पाकिस्तान अमेरिका से जाकर रोता था।
अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता था। लेकिन भारत ने उसकी एक नहीं सुनी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इंदिरा को फोन किया। लेकिन इंदिरा ने किसी भी बात को नहीं माना। जिससे खीझ कर रिचर्ड निक्सन (
Richard Nixon
) ने इंदिरा को 'बिच' कह दिया।

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वहीं अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) हेनरी किसंजर (Henry Kissinger) ने इंडियंस को बास्टर्ड बोल दिया। यूं तो इस तरह दुनिया के ताकतवर लोगों की बातचीत कभी पता न चलती लेकिन अमेरिका में एक रिवाज है। एक तय समय के बाद सीक्रेट फाइलें और इस तरह की बातचीत को सार्वजनिक कर दिया जाता है। 2005 में यह बात सार्वजिनक हुई थी। तो पता चला कि अमेरिका का प्रेसीडेंट हमारे देश के प्रधानमंत्री से इतना परेशान था कि गालियां तक देने लगा वो भी एक महिला को।

ब्रेकफास्ट टेबल पर इंदिरा की धमकी

दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजिन्दर सच्चर ने भी 1971 जंग का के एक दिलचस्प वाकिए का उल्लेख किया था। 1971 में पाकिस्तान की सेना बंगालियों पर लगातार जुल्म कर रही थी। जिससे हजारों बंगाली हर रोज सीमा पार करके भारत में आ रहे थे।
भारत सरकार ने सीमा पर शरणार्थी कैंप बनवाए थे। उस समय अमेरिका के NSA हेनरी किसंजर ने सीमा का दौरा किया। उनका मकसद ये बताना था कि भारत पाकिस्तान के रास्ते में न आए। जो कर रहा है वह करने दे। जिस दिन किसंजर को आना था इंदिरा ने पीएम आवास पर ब्रेकफास्ट मीटिंग रखी।
मीटिंग से एक दिन पहले इंदिरा ने कमांडर इन चीफ सैम मानिक शॉ को फोन करके कहा कि वह कल घर पर ब्रेकफास्ट करें। साथ ही मानिक शॉ को सेना की वर्दी में आने को कहा। मानिक शॉ को समझ नहीं आया कि पर्सनल ब्रेकफास्ट के लिए आखिर वर्दी में क्यों बुलाया।
मानिक शॉ ने आखिरकार उनसे पूछ ही लिया कि मैडम क्या यूनीफॉर्म में आना जरूरी है। इंदिर ने बस हां कह दिया और फोन रख दिया। वैसे भी प्रधानमंत्री से दोबार सवाल पूछने की हिम्मत किसमें थी? अगले दिन वो सुबह समय पर पहुंच गए। मानिकशॉ अपनी फिल यूनीफॉर्म में वहां पहुंचे थे।

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अमेरिकी NSA किसंजर को वहां देख कर वह हैरत में पड़ गए। ब्रेकफास्ट के दौरान इंदिरा ने कई बार किसंजर से ईस्ट पाकिस्तान में पाकिस्तान सेना की ज्यादती के बारे में बताया लेकिन किसंजर ने उसे अनसुना कर दिया। इंदिरा ने किसंजर से कहा कि अमेरिका पाक को समझाए कि अगर ऐसा करता रहा तो आने वाला वक्त पाक के लिए अच्छा नहीं होगा।
किसंजर ने उनसे पूछ लिया कि आप क्या करेंगी? तब इंदिरा ने खड़े होकर यूनीफॉर्म में बैठे जनरल मानिकशॉ की ओर इशारा करके कहा कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान को नहीं समझाया तो हमें इनकी मदद लेनी पड़ेगी। इशारा करने का तरीका बेहद ही शानदार और सरल था। यह वाकिया असल लड़ाई से 5 महीने पहले जुलाई में हुआ था।
किसंजर समझाने आया था और खुद समझ के चला गया। इंदिरा ने जो बोल्ड कदम उठाया था वो काफी बहादुरीभरा था क्योंकि उस समय अमेरिका को इस तरह आंख दिखाने की हिम्मत किसी में नहीं थी। दिसंबर में युद्ध छिड़ गया। अमेरिका ने अपना सातवां बेड़ा मदद के लिए भेजा लेकिन वह काम नहीं आया।

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भारत ने अमेरिकी पंडुब्बी गाजी को डुबो दिया। कराची हार्बर को तबाह कर दिया। और बांग्लादेश आजाद हो गया। पाकिस्तानी जनरल नियाजी ने 93000 सैनिकों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था। अब पाकिस्तान को समझ में आ गया था कि सात समुंदर पार बैठे दोस्त की मदद से जंग नहीं जीती जा सकती।
इसी लिए शिमला समझौते में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो गया। वक्त गुजरा और यह बातें सार्वजनिक हुईं। बाद में किसंजर ने भारतीयों को बास्टर्ड कहने के लिए अफसोस भी जाहिर किया।
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