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हामिद अंसारी के इस बयान से देश में गरमाई राजनीति, नायडू-शाहनवाज ने किया पलटवार

हामिद अंसारी ने संसद में सरकार को एक बार फिर इशारों में नसीहत दी।

हामिद अंसारी के इस बयान से देश में गरमाई राजनीति, नायडू-शाहनवाज ने किया पलटवार

राज्यसभा में निवर्तमान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने विदाई भाषण में गुरुवार को कहा कि लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। इसके लिए उन्होंने सर्वपल्ली राधाकृष्णन के एक बयान का जिक्र किया। संसद में सरकार को एक बार फिर इशारों में नसीहत दी।

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की पहचान उसमें अल्पसंख्यकों को मिली सुरक्षा से होती है। उपराष्ट्रपति अंसारी ने कहा,'मैंने 2012 में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के हवाले से कुछ कहा था। आज भी मैं उनके शब्दों को कोट कर रहा हूं। किसी लोकतंत्र की पहचान इससे होती है कि उसमें अल्पसंख्यकों की कितनी सुरक्षा मिली हुई है?

उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में अगर विपक्षी समूहों को स्वतंत्र होकर और खुलकर सरकार की नीतियों की आचोलना करने की इजाजत न हो तो वह अत्याचार में बदल जाती है।' उपराष्ट्रपति के इस बयान पर उच्च सदन में खूब तालियां भी बजीं।

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अंसारी ने कहा, 'साथ में अल्पसंख्यकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। उनके पास आलोचना का अधिकार है लेकिन उस अधिकार का मतलब यह नहीं है कि संसद को बाधित करें।'

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता चर्चा में है न कि चर्चा को बाधित करने में। अंसारी के इस बयान से देश में राजनीति का माहौल काफी गरमा गया है।

अंसारी के बयान पर नव निर्वाचित उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बिना नाम लिए निशाना साधा। उन्‍होंने कहा देश में अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना होने की बात को महज ‘राजनीतिक प्रचार’ है।

नायडू ने कहा,‘कुछ लोग कह रहे हैं कि अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं। यह एक राजनीतिक प्रचार है। पूरी दुनिया के मुकाबले अल्पसंख्यक भारत में ज्यादा सकुशल और सुरक्षित हैं और उन्हें उनका हक मिलता है।’

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