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भारत का NSG में शामिल होने का सपना रह गया अधूरा

अमेरिका ने ओबामा कार्यकाल के दौरान भारत को एनएसजी सदस्‍य न बनाए जाने पर अफसोस जताया है।

भारत का NSG में शामिल होने का सपना रह गया अधूरा
वॉशिंगटन. अमेरिका में हाल ही में हुए चुनाव के बाद बराक ओबामा का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है और ऐसे में अमेरिका के एक सीनियर अधिकारी ने भारत और अमेरिका को लेकर बड़ा खुलासा किया है। बता दें कि अमेरिकी नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल में साउथ एशियन अफेयर्स के सीनियर डायरेक्टर पीटर लावॉय ने ओबामा के 8 सालों में भारत-अमेरिका की साझेदारी से कई आतंकी साजिशें नाकाम करने में कामयाबी मिली है।
ट्रंप प्रशासन के भारत-अमेरिकी संबंधों से जुड़े सवाल का सीधा जवाब ना देते हुए लावॉय ने कहा कि मेरा मानना है कि संबंधों की यह यात्रा जारी रहेगी क्योंकि यह भारत के साथ-साथ अमेरिका के भी हित में है। अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही इसे (इस संबंध को) जारी रखने और भारत के साथ साझेदारी को मजबूत बनाने के महत्व से परिचित हैं।
पीटर लावॉय ने कहा कि यह (भारत-अमेरिकी संबंध) वास्तव में ओबामा प्रशासन की सबसे सफल कहानियों में से एक है।’ उन्होंने कहा कि कई सारे मुद्दों पर भारत के साथ साझेदारी का मजबूत होना और उसका विस्तार होना अमेरिका के लिए बेहद अह्म है। अमेरिकी सरकार में विभिन्न पदों पर रहते हुए बीते कई दशकों से दक्षिण एशियाई मुद्दों खासकर भारत और पाकिस्तान से संबंधित मुद्दों पर काम कर रहे लावॉय ने विश्वास जताया कि दोनों देशों में मिल रहे द्विदलीय समर्थन को देखते हुए यह संबंध और मजबूत होगा।
लावॉय ने कहा कि कहा कि जब आप भविष्य की उम्मीदों के बारे में बात करते हैं तो मुझे लगता है कि सभी संकेत साझेदारी में और मजबूती और विस्तार की ओर इशारा करते हैं।’ निवर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा को विरासत में मिले भारत से जुड़े मुद्दे निश्चित तौर पर द्विदलीय थे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा से उनके वारिस तक हम इस तरह से अपने संबंधों में आगे बढ़ रहे हैं। यह मुद्दा बहुत हद तक द्विदलीय है। इसलिए मुझे लगता है कि अमेरिका में दोनों दलों में भारत के साथ साझेदारी से होने वाले फायदों समेत अपने हितों को जारी रखने के लिए जो अनिवार्यताएं हैं उन्हें लेकर भी प्रशंसा का भाव है।

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