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आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका ने किया भारत के साथ करार

दोनों देश आतंकवादी गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर रखकर ठोस कार्यवाही करेंगे।

आतंकवाद से निपटने के लिए अमेरिका ने किया भारत के साथ करार
नई दिल्ली. भारत में पाक समर्थित आतंकवादियों की लगातार घुसपैठ को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सीमाओं पर कड़ी सुरक्षा और अत्याधुनिक सुरक्षा चक्र को मजबूत करने की कवायद को तेज की हुई है। आतंकवाद के खात्मे की मुहिम में अब अमेरिका ने भारत के साथ मिलकर एक मल्टी एजेंसी सेंटर जैसी तकनीक पर करार किया है, जिसके जरिए दोनों देश आतंकवादी गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर रखकर ठोस कार्यवाही करेंगे। गृहमंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका ने लगातार मंडराते आतंकी खतरे से निपटने और आतंकवाद को नेस्तनाबूद करने के एक ऐसा ठोस कदम उठाया है, जिसमें भारत को आतंकवादियों की गतिविधियों की वास्तविक और समय से जानकारी हासिल करने के लिए एक मल्टी एजेंसी सेंटर स्थापित होगा। इसके लिए ही में गृह सचिव राजीव महर्षि और भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा एक अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कर चुके हैं।
मादक पदार्थो की तस्करी पर नजर
सूत्रों की माने तो भारत व अमेरिका के बीच यह करार भारत के खिलाफ पाक समर्थित आतंकवाद या अन्य आतंकी संगठनों की गतिविधियों के खिलाफ बड़ा हथियार साबित होगा। दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले इस गंभीर निर्णय में दोनों देशों के बीच आतंकवादियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट का भी आदान-प्रदान किया जाएगा। इसके लिए भारत आतंकवादियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट और उनसे जुड़े हुए सभी तरह के दस्तावेजों यानि डोजियर को भी मल्टी एजैंसी स्क्रीनिंग सेंटर को देता रहेगा, ताकि भारत उन तमाम आतंकवादियों पर नकेल कसी जा सके, जो किसी न किसी रूप में दूसरे देशों में रह रहे हैं। गृह मंत्रालय के के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुए इस अनुबंध में उन तमाम चीजों को भी ध्यान में रखा गया है कि यदि भारत के खिलाफ नकली मुद्रा या मादक पदार्थो की तस्करी जैसी आर्थिक आतंकवाद फैलाने की कोशिश किसी देश के जरिए होती है, तो उस पर भी नजर रखी जाएगी।

ऐसे काम करेगा टैररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर
भारत और अमेरिका के बीच मल्टी एजेंसी सेंटर यानि टैररिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर के बीच हॉट लाइन संपर्क बना रहेगा और आतंकियों की साजिश की जानकारी हेतु रियल टाइम सूचना का जरिया बनेगा। हॉट लाइन के जरिए आतंकियों की जानकारी और उनकी फंडिंग रोकने हेतु भी तुरंत जानकारी साझा होती रहेंगी। यही नहीं भारत-अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के ताजा इनपुट, जिसमें मोस्टवांटेड आतंकियों की लिस्ट होगी और उनसे संबंधित डोजियर की पूरी जानकारी भी साझा होगी। भारत आईएसआईएस की गतिविधियों में शामिल लोगों की एक लिस्ट बनाकर मल्टी एजैंसी सैंटर में साझा करेगा, जिसके जरिए भारत से अमेरिका गए लोगों पर उनकी गतिविधियों पर नजर रख सके। भारत-अमेरिका के साथ शामिल होकर अब 30 देशों के उस पूल में शामिल हो गया है, जो पहले से आतंकियों की गतिविधियों को लेकर रियल टाइम जानकारी साझा करते हैं।
खुफिया तंत्रों के बीच तालमेल
दुनियाभर में मंडराते आईएसआईएस और आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए ऐसी ही पहल भारत की खुफिया एजेंसियों आईबी और रॉ ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के साथ टैररिस्ट स्क्रीनिंग (टीएससी) बनाने को लेकर एक ठोस कदम उठाया है। इसमें टेररिस्ट स्क्रीनिंग सैंटर के जरिए आतंकियों की सूचना रियल टाइम आदान-प्रदान होगा, जिससे घटना होने से पहले कदम उठाए जा सकेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एनएसजी को आतंकवाद से मुकाबला करने वाला एक शानदार बल करार देते हुए एनएसजी को मजबूत बनाने की रणनीतियों को गति दी है, जिसमं उनके बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण को उच्च कोटि का उन्नत बनाने का फैसला किया गया।
अमेरिका जाएंगे राजनाथ
इस करार को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह अगले महीने सितंबर में अमेरिका जाएंगे, जहां पर रियल टाइम टेररिस्ट स्क्रीनिंग सैंटर के बारे में विस्तृत वार्ता करेंगे। गौरतलब है कि पाक समर्थित आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने के लिए भारत सरकार ने कश्मीर में सीमापार की कथित साजिश के कारण कश्मीर में बिगड़े हालातों के बीच ही सीमाओं पर सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक तकनीक देकर सुरक्षा चक्र को कड़ा करना शुरू कर दिया, जिसमें सरकार की पांच स्तरीय सुरक्षा भी शामिल है। इसका मकसद हर हालत में सीमापार से आतंकियों की घुसपैठ को रोकना है।
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