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कागजों में सिमटी शहीदों की शहादत, बच्चों को नहीं मिली मुफ्त शिक्षा

इस मामले पर कोई कार्रवाई न किए जाने से नाराज एनसीपीसीआर।

कागजों में सिमटी शहीदों की शहादत, बच्चों को नहीं मिली मुफ्त शिक्षा
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नई दिल्ली. करीब दो महीने पहले 18 सितंबर को उरी में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले में शहीद हुए सेना के 19 जवानों के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की कोई व्यवस्था अब तक नहीं हुई है। इसमें राज्य सरकारों की उदासीनता साफ नजर आ रही है। हालांकि उरी की घटना के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्यों को पत्र लिखकर सिफारिश की थी कि वो शहीद हुए जवानों के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की व्यवस्था करें।
सिफारिशों पर ध्यान दें राज्य
इस मामले पर कोई कार्रवाई न किए जाने से नाराज एनसीपीसीआर ने बीते महीने 24 अक्टूबर को हुई केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (कैब) की बैठक में इस मामले को जोरशोर से उठाया। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने हरिभूमि को बताया कि उन्होंने कैब की बैठक में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के समक्ष आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा आयोग ने राज्यों से कहा है कि शहीद जवानों के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा देने के लिए राज्य सरकारें शिक्षा का अधिकार कानून 2009 की धारा 12 (1)(सी) के क्रियान्वयन को अधिसूचित करवाएं। इससे ही बच्चों को स्कूलों में आर्थिक रूप से पिछड़ों की श्रेणी (ईडब्ल्यूएस) में मुफ्त शिक्षा दी जा सकेगी।
जरूरतमंद समुह
शहीदों के परिवार के बच्चे भी एक प्रकार से जरूरतमंद या डिस्ऐडवांटेज समुह हंै, जिसे राज्य सरकारों से लेकर समाज व प्रशासन सभी से मदद की नितांत जरूरत है। अगर कोई बच्चा निजी स्कूल में पढ़ रहा है तो वो उसे आर्थिक रूप से असक्षम श्रेणी यानि ईडब्ल्यूएस में डाल सकते हैं और उसकी पढ़ाई-लिखायी का भार उठा सकते हैं।
ये जवान हुए उरी में शहीद
उरी में सेना की 6 बिहार और 10 डोगरा रेजीमेंट के 19 जवान शहीद हुए। इसमें सूबेदार करनैल सिंह, हवलदार रवि पॉल, हवलदार (कुक) अशोक कुमार, सिपाही राकेश सिंह, सिपाही जावरा मुंडा, सिपाही नयमान कुजर, सिपाही (पेंटर) गणेश शंकर, लांसनायक एसके विद्यार्थी, सिपाही (कुक) बिश्वजीत गोराई, सिपाही (कुक) जी दलाई, हवलदार (कुक) एनएस रावत, सिपाही टी.एस सोमनाथ, लांसनायक (कुक) जी शंकर, सिपाही यूकी जनराव, लांसनायक आरके यादव, सिपाही (कुक) हरिंदर यादव और सिपाही (कुक) राजेश के सिंह, सिपाई के.विकास. जर्नाधन, राष्ट्रीय राइफल्स के गर्नर पिताबस माझी शामिल हैं।
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