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GST से पहले के इनपुट क्रेडिट का दावा करने वाली इकाइयों को लगेगा झटका, CBEC करेगी जांच

माल एवं सेवाकर (GST) व्यवस्था शुरू होने से पहले अक्तूबर 2016 से जून 2017 के दौरान पंजीकरण कराने वाली, एकल स्वामित्व वाली फर्में, एलएलपी और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इनपुट कर क्रेडिट दावा करने के लिए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क (CBEC) की जांच के घेरे में हैं।

GST से पहले के इनपुट क्रेडिट का दावा करने वाली इकाइयों को लगेगा झटका, CBEC करेगी जांच

माल एवं सेवाकर (GST) व्यवस्था शुरू होने से पहले अक्तूबर 2016 से जून 2017 के दौरान पंजीकरण कराने वाली, एकल स्वामित्व वाली फर्में, एलएलपी और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इनपुट कर क्रेडिट दावा करने के लिए केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क (CBEC) की जांच के घेरे में हैं।

सूत्रों ने बताया कि CBEC ने इस तरह की इकाइयों की सूची तथा उनके द्वारा दायर रिटर्न तथा जीएसटी से पहले की अवधि के लिए क्रेडिट दावे का ब्योरा अपने फील्ड अधिकारियों को सौंपा है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद ऐसी इकाइयों द्वारा बदलाव के समय का लाभ उठाते हुये अनुचित तरीके से क्रेडिट दावों की जांच करना है।

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इन इकाइयों ने 1 जुलाई, 2017 को GST लागू होने से पहलेतुरत फुरत जीएसटी पंजीकरण लिया था। ऐसा माना जा रहा है कि कई व्यापारियों तथा छोटे कारोबारियों ने उत्पाद एवं सेवा कर क्रेडिट लेने के लिए जीएसटी पंजीकरण हासिल किया है, जो पूर्ववर्ती उत्पाद, सेवा कर और वैट व्यवस्था में सिर्फ विनिर्माताओं को उपलब्ध था।

सूत्रों ने बताया कि शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कई नए बने एलएलपी और एचयूएफ के अलावाएकल स्वामित्व की फर्मों ने जीएसटीलागू होने से पहले की अवधि के लिए क्रेडिट का दावा किया है जबकि वे इसके पात्र नहीं हैं। सीबीईसी ने सभी मुख्य आयुक्तों को एक करोड़ रुपये से अधिक के क्रेडिट दावों की जांच को कहा है।

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पिछले साल जुलाई में GST की ओर बदलाव के तहत करदाताओं को फॉर्म TRAN-1 भरने और GST पूर्व व्यवस्था में आखिरी रिटर्न में घोषित क्रेडिट के आधार पर कर क्रेडिट लेने की सुविधा दी थी।

राजस्व विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कारोबारियों द्वारा सितंबर, 2017 जीएसटी से पहले की अवधि के लिए 65,000 करोड़ रुपए के इनपुट कर क्रेडिट के दावे किये गये हैं।

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