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2018-19 के लिए 2.82 लाख करोड़ रुपए होगा रक्षा बजट, बनेंगे दो नए रक्षा कॉरिडोर

भारत को पड़ोसी मुल्कों से लोहा लेने के लिए रक्षा बजट पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान सरकार ने रक्षा बजट में लगातार कमी की है और अभी यह जीडीपी का 1.5 फीसद है।

2018-19 के लिए 2.82 लाख करोड़ रुपए होगा रक्षा बजट, बनेंगे दो नए रक्षा कॉरिडोर

वर्ष 2018- 19 के लिये रक्षा बजट बढ़ाकर 2.82 लाख करोड़ रुपये किया गया। चालू वित्त वर्ष में यह 2.67 लाख करोड़ रुपये था। भारत के पड़ोसी देश लगातार हथियार और परमाणु बम का निर्माण करने में लगे है। ऐसे में भारत को पड़ोसी मुल्कों से लोहा लेने के लिए रक्षा बजट पर ध्यान देना चाहिए। वर्तमान सरकार ने रक्षा बजट में लगातार कमी की है और अभी यह जीडीपी का 1.5 फीसद है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर का विकास करेगी और रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक उद्योग अनुकूल सैन्य उत्पादन नीति लेकर आएगी। जेटली ने अपने बजट संबोधन में देश की सीमाओं पर चुनौतियों से निपटने तथा जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर दोनों जगह आंतरिक सुरक्षा माहौल को प्रबंधित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्ष में रक्षा बलों की अभियानगत क्षमता को आधुनिक बनाने और मजबूत करने पर काफी जोर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि‘सरकार देश में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर के विकास के लिए कदम उठाएगी। जेटली ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के जरिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल ‘‘रक्षा उत्पादन नीति 2018'' भी लेकर आएगी।

उन्होंने कहा कि देश को रक्षा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के वास्ते भारत की मूल रक्षा उत्पादन क्षमता के विकास के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं। मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के साथ साथ निजी निवेश के द्वार खोल दिए गए हैं।

आधुनिक होगी रक्षा प्रणाली

सरकार ने रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाने के संकेत देते हुए इसके लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना प्राथमिकता में रखा है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आज आम बजट पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में रक्षा बलों का आधुनिकीकरण और उनकी कार्य क्षमताओं में वृद्धि पर सरकार का जोर रहा है। उन्होंने सीमाओं की चुनौतियों से निपटने और जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर भारत में आंतरिक सुरक्षा को बनाए रखने में सैन्य बलों की भूमिका की प्रशंसा की।

याद करें कि वित्त वर्ष 2015-16 और वित्त वर्ष 2016-17 के लिए आवंटन बिना बदलाव के 2,46,727 करोड़ रुपए ही रहा। मीडिया ने इस बात तो फटाफट हाथों-हाथ लिया कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 2,74,114 करोड़ रुपये का आवंटन करके 6।2 फीसद बढ़ोत्तरी की गई है। लेकिन इस आवंटन को रुपए के अवमूल्यन और वार्षिक मुद्रास्फीति के परिप्रेक्ष्य से अलग करके देखना नादानी होगा। यह बात भी ध्यान में रखनी चाहिए कि वर्ष 2015-2016 में 2,46,727 करोड़ का रक्षा आवंटन 40 अरब डॉलर के बराबर था, जबकि पिछले 2016-2017 के बजट में 2,46,727 करोड़ का आवंटन व्यावहारिक रूप से 40 अरब डॉलर से कम था।

रक्षा उत्पादन में बदलाव जरूरी

वित्त मंत्री ने कहा कि देश को रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लेकर रक्षा उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई पहल की गयी हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के साथ-साथ निजी निवेश के लिए भी दरवाजे खोले गये हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार देश में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन गलियारे विकसित करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के लिए अनुकूल ‘रक्षा उत्पादन नीति 2018' लाएगी ताकि सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को घरेलू उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर का विकास

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि सरकार दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर का विकास करेगी और रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक उद्योग अनुकूल सैन्य उत्पादन नीति लेकर आएगी। जेटली ने अपने बजट संबोधन में देश की सीमाओं पर चुनौतियों से निपटने तथा जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर दोनों जगह आंतरिक सुरक्षा माहौल को प्रबंधित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्ष में रक्षा बलों की अभियानगत क्षमता को आधुनिक बनाने और मजबूत करने पर काफी जोर दिया गया है।

रक्षा उत्पादन नीति 2018

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार देश में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर के विकास के लिए कदम उठाएगी। जेटली ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के जरिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल ‘‘रक्षा उत्पादन नीति 2018'' भी लेकर आएगी।

आत्मनिर्भर बनाना

वित्त मंत्री ने कहा कि देश को रक्षा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के वास्ते भारत की मूल रक्षा उत्पादन क्षमता के विकास के लिए कई पहलें शुरू की गई हैं। मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के साथ साथ निजी निवेश के द्वार खोल दिए गए हैं।

जीडीपी का 3 फीसद रक्षा बजट की जरुरत

इसके साथ ही ऑपरेशनल जरूरतें बताती हैं कि भारत को क्यों सालाना जीडीपी का 3 फीसद रक्षा बजट के आवंटन की जरूरत है। रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति ने कहा है कि सशस्त्र सेनाओं के लिए समग्र रूप से कम फंड का आवंटन करने के बाद इस तरह के रटे-रटे जवाब से सही नहीं ठहराया जा सकता कि, ‘सेनाओं के लिए आवंटन वित्त मंत्रालय द्वारा लगाई गई सीमा पर आधारित है।’ आशा कर सकते हैं कि सरकार यह बात याद रखेगी।

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