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भारत को पूर्ण शिक्षित होने में लग जाएंगे 50 साल: यूनेस्को

भारत में करीब 11.1 लाख बच्चों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है।

भारत को पूर्ण शिक्षित होने में लग जाएंगे 50 साल: यूनेस्को
नई दिल्ली. यूनेस्को द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट ने भारत की शिक्षा व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत को यूनिवर्सल एजुकेशन के लक्ष्य को हासिल करने में करीब 50 साल लग जाएंगे। भारत के लिए सार्वभौमिक शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक सदी का समय लग जाएगा।
यूनेस्को ने सोमवार को एक रिपोर्ट में बताया कि भारत को प्राथमिक शिक्षा को पूरे देश में लागू करवाने और अनिवार्य करने में करीब 2050 तक का समय और सेकेंडरी शिक्षा में 2060 तो वहीं सार्वभौमिक शिक्षा यानि संपूर्ण भारत को शिक्षित करने में 2085 तक का समय लग जाएगा। भारत ने पूरे देश में शिक्षा की अनिवार्यता के लिए जो लक्ष्य बनाए हैं, उन्हें पूरा करने में देश को करीब पचास साल का वक्त लगेगा क्योंकि भारत में जहां साक्षरता का स्तर बढ़ा है वहीं गरीबी और शिक्षा की गुणवत्ता की वजह से अनपढ़ और अल्पशिक्षित लोगों की संख्या भी बढ़ी है।
भारत में आज भी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कूल नहीं भेजा जाता है। ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटिरिंग के अनुसार, "शिक्षा के क्षेत्र में मौलिक परिवर्तन के बिना इसके लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सकता है।"
रिपोर्ट का दावा है कि, भारत में 60 लाख से अधिक बच्चों ने कोई औपचारिक या प्राथमिक शिक्षा प्राप्त नहीं की है। इसके अलावा, माध्यमिक स्तर की पढ़ाई को बीच में ही छोड़ने में भी भारत की संख्या काफी ज्यादा है। भारत में करीब 11.1 लाख बच्चों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। बता दें कि भारत में माध्यमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की यह संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा बताई गई है। इन बच्चों ने पांचवी और आठवीं कक्षा में ही पढाई छोड़ दी थी।
यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक 46.8 लाख से ज्यादा बच्चें माध्यमिक स्तर और उससे ऊपरी स्तर पर स्कूल से बाहर हैं। करीब 29 लाख छात्र कभी प्राथमिक स्कूल नहीं गए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2020 तक अशिक्षा के कारण 40 करोड़ श्रमिकों की कमी हो जाएगी। किसी खास क्षेत्र में योग्यता न रखने के कारण श्रमिकों की संख्या में कमी आएगी।
इस मामले में एक और आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है कि करीब दुनिया भर में 40 फीसदी छात्रों को उस भाषा में पढ़ाया जाता है जिसे वह ठीक प्रकार समझ भी नहीं पाते हैं।
द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट का कहना है कि, "यह उचित समय है जब देश की सरकार को शिक्षा प्रणाली में बदलाव करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।"
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