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कावेरी विवादः हल न निकला तो अनशन पर बैठूंगी- उमा भारती

केंद्र के साथ बेनतीजा रही कर्नाटक व तमिलनाडु की बैठक

कावेरी विवादः हल न निकला तो अनशन पर बैठूंगी- उमा भारती
नई दिल्ली. केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कर्नाटक एवं तमिलनाडु की जनता से कावेरी मुद्दे पर शांति एवं सद्भाव का माहौल बनाये रखने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह अनशन पर भी बैठने को तैयार है। गुरुवार को यहां नई दिल्ली में इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और तमिलनाडु के लोक निर्माण मंत्री ई।के। पलनीस्वामी के साथ लगभग चार घण्टे तक चली मैराथन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों राज्यों को शांति बनाने की अपील करते हुए सुश्री उमा भारती ने कहा कि यदि इस मुद्दे का हल न निकला तो दोनों राज्यों में शांति बनाये रखने के लिए यदि जरूरत पड़ी, तो वहां उपवास पर भी बैठ सकती हैं।
इससे पहले दोनो राज्यों की बैठक में इस मुद्दे पर उमा भारती ने दोहराया कि हमारी संस्कृति में पानी को सदा से प्यार और मौहब्बत के लिए जाना जाता है। यहाँ तक कि हमारे यहाँ युद्ध के दौरान शत्रु पक्ष के घायल सैनिकों को पानी पिलाने की परम्परा रही है। दोनों राज्यों के बीच पानी को लेकर विवाद के संदर्भ में सुश्री भारती ने एक भारतीय संत का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे यहाँ कम-से-कम प्राप्त करने और अधिक-से-अधिक देने की परम्परा रही है। इसके अलावा बैठक में कर्नाटक की ओर से तमिलनाडु को तीन दिन तक 6000 क्यूसेक पानी देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल करने का फैसले पर अमल करने क अपील की गई। कर्नाट के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राज्य के जमीनी हालात और कावेरी बेसिन के चार जलाशयों में पानी की मौजूदा स्थिति से केंद्र को अवगत करा रहे हैं कि उसके पास इतना पानी नहीं है कि इतना पानी तमिलनाडु को दे सके। बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव, केद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव और विशेष कार्याधिकारी, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी जानकारी
दोनों राज्यों की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री उमा भारी ने पत्रकारों को बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि दोनांे राज्यों के बीच बैठक बहुत ही सदभावनापूर्ण माहौल में हुई। कर्नाटक ने एक प्रस्ताव दिया कि दोनों राज्यों में कावेरी घाटी में जल उपलब्धता का समुचित अध्ययन करने के लिए केंद्र की तरफ से विशेषज्ञों की एक समिति भेजी जाए। लेकिन इस प्रस्ताव पर तमिलनाडु को कुछ आपत्तियाँ थी, इसलिए इस पर आम सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने दोनों पक्षों और केंद्र सरकार को एक अवसर दिया है कि वह इस मुद्दे का कोई सर्वसम्मत हल निकालें। बैठक के समापन पर दोनों पक्षों का धन्यवाद देते हुए मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय की बैठक के निष्कर्षो को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा देगा। बैठक में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव, केद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सचिव और विशेष कार्याधिकारी, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण के महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
कर्नाटक पर लगातार दबाव
इससे पहले भाजपा, जद(एस) और रैयत संघ समेत राज्य के विपक्षी दलों ने सर्वदलीय बैठक में राज्य सरकार से कहा कि वह तमिलनाडु को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अतिरिक्त पानी न दे। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक सरकार को आदेश दिया था कि वह तमिलनाडु को अगले तीन दिन तक कावेरी का 6000 क्यूसेक पानी छोड़े। कोर्ट ने साथ ही मामले का राजनीतिक हल निकालने के लिए केंद्र सरकार को दो दिन के भीतर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने का निर्देश भी दिया था। कैबिनेट की बैठक के बाद बुधवार को सिद्धारमैया ने बताया था कि वह राज्य के जमीनी हालात और कावेरी बेसिन के चार जलाशयों में पानी की मौजूदा स्थिति से केंद्र को अवगत कराएंगे।

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