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रैगिंग पर यूजीसी ने अपनाया कड़ा रूख, शैक्षणिक संस्थाओं को नए दिशानिर्देश जारी किए

शैक्षणिक सत्र में सभी छात्रों एवं अभिभावकों से इस संबंध में अनिवार्य रूप से आनलाइन शपथपत्र लेना सुनिश्चित करने को कहा है।

रैगिंग पर यूजीसी ने अपनाया कड़ा रूख, शैक्षणिक संस्थाओं को नए दिशानिर्देश जारी किए
नई दिल्ली. शैक्षणिक संस्थाओं में रैगिंग को अपराध बताते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी संस्थाओं से इस बुराई को समाप्त करने और हर शैक्षणिक सत्र में सभी छात्रों एवं अभिभावकों से इस संबंध में अनिवार्य रूप से आनलाइन शपथपत्र लेना सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि यूजीसी के सचिव जसपाल एस संधु ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस बारे में पत्र लिखकर रैगिंग की बुराई पर लगाम लगाने को कहा है।
कुलपतियों को पत्र
संधु ने अपने पत्र में कहा कि आपके संज्ञान में एक बार फिर यह बात लायी जाती है कि रैगिंग अपराध है और यूजीसी ने उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में रैगिंग की बुराई पर लगाम लगाने के लिए नियमन को अधिसूचित किया है। सभी संस्थाओं से इन नियमनों का पूरी तरह से पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
इन संशोधनों के अनुरूप सभी संस्थाओं से हर वर्ष प्रत्येक छात्र एवं अभिभावकों से इसका पालन करने के संदर्भ में शपथपत्र लेना सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाता है। आयोग के सचिव की ओर से विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि सभी विश्वविद्यालयों एवं संस्थाओं से आग्रह किया जाता है कि रैगिंग निरोधक तंत्र स्थापित करें और विभिन्न माध्यमों के जरिये इसका पर्याप्त प्रचार प्रसार करें।
सीसीटीवी लगाने होंगे
संस्थाओं में विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाने को भी कहा है। शैक्षणिक संस्थाओं से विवरणिकाओं एवं पुस्तिका में रैंगिक निरोधक उपायों के बारे जानकारी देने को कहा गया है। हास्टल और छात्रों के रहने के स्थानों की औचक निरीक्षण करने को भी कहा गया है। रैगिंग निरोधक हेल्पलाइन के बारे में छात्रों एवं अभिभावकों के बारे में जानकारी देने को कहा गया है। यूजीसी ने छात्रों के लिए राष्ट्रीय रैगिंग निरोधक हेल्पलाइन नंबर 1800 180 5522 जारी किया है।
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