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तीन तलाक पर नहीं मिला इन तीन बड़े सवालों का जवाब

तीन तलाक पर सुनवाई करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पांचों जज अलग-अलग धर्म के हैं।

तीन तलाक पर नहीं मिला इन तीन बड़े सवालों का जवाब
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सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार करते हुए तीन तलाक को भारत से हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस दौरान कानून बनाने के लिए कहा है।

इसके साथ ही उन तीन बड़े सवालों का भी जवाब नहीं मिला जिसमें यह तय होना था कि मुस्लिम धर्म में तीन तलाक मान्य है या नहीं। इन तीन बड़े सवालों के जवाब मिलते तो मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी आबाद होती...

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिला इन तीन सवालों का जवाब...

-तलाक-ए बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं?

-क्या इन दोनों मुद्दों को महिला के मौलिक अधिकारों से जोड़ा जा सकता है या नहीं?

-क्या कोर्ट इसे मौलिक अधिकार करार देकर कोई आदेश लागू करा सकता है या नहीं?

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तीन तलाक पर ये अलग-अलग धर्म के पांच जज देंगे फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ में पांचों जज अलग-अलग धर्म के हैं। इन जजों में मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कूरियन जोसेफ (ईसाई), आरएफ नारिमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू) और अब्दुल नजीर (मुस्लिम) हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज किसी भी मजहब के हों वो अदालत में फैसले सिर्फ और सिर्फ भारतीय संविधान की रोशनी में लेते हैं।

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तीन तलाक पर कोर्ट में केन्द्र ने रखे थे ये सवाल

1. धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत तीन तलाक, हलाला और बहु-विवाह की इजाजत संविधान के तहत दी जा सकती है या नहीं ?

2. समानता का अधिकार और गरिमा के साथ जीने का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में प्राथमिकता किसको दी जाए?

3. पर्सनल लॉ को संविधान के अनुछेद 13 के तहत कानून माना जाएगा या नहीं?

4. क्या तीन तलाक, निकाह हलाला और बहु-विवाह उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत सही है, जिस पर भारत ने भी दस्तखत किये हैं?

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