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मुस्लिम औरतों की आजादी, हिन्दू-सिख और ईसाई पर सवाल

मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी के लिए बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार लोकसभा में पास होकर आगे बढ़ गई है।

मुस्लिम औरतों की आजादी, हिन्दू-सिख और ईसाई पर सवाल
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मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से आजादी के लिए बीड़ा उठाया है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार लोकसभा में पास होकर आगे बढ़ गई है। गुरुवार को तीन तलाक को जुर्म घोषित करने और सजा मुकर्रर करने संबंधी विधेयक को बिना किसी संसोधन के लोकसभा पास कर दिया गया।

अब सरकार इस विधेयक को राज्यसभा में पारित कराने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है। ऐसे अब जो सवाल उठ रहे हैं मुस्लिम महिलाओं को तो त्वरित तालाक से भले ही आजादी मिलने वाली है लेकिन दूसरे कौम की महिलाओं का क्या जो अब भी बिना तलाक दिए पति द्वारा छोड़ दी गई हैं।

सवाल यह उठता है कि मोदी सरकार ऐसी महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए कब कदम उठाएगी? देश में पति से अलग की गई (परित्यक्त) औरतों की तादाद तलाकशुदा महिलाओं की संख्या से दोगुने से ज्यादा है।

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बता दें कि पीएम मोदी को मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए 15 अगस्त के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भी ऐलान करना पड़ा था। उन्होंने कहा था कि धर्म और समुदाय के नाम पर हमारी मांओं और बहनों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह बयान सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के लिए था, 20 लाख से अधिक परित्यक्त हिंदू महिलाओं के लिए इंसाफ की चिंता सरकार कब करेगी?

अन्य कौम की महिलाओं को कब मिलेगा इंसाफ?

बेशक मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने के लिए लोकसभा में विधेयक पारित कराकर इसे देश के लिए ऐतिहासिक बता रही है, लेकिन हिंदू, ईसाई, सिख सहित अन्य धर्म की महिलाओं के हक में इंसाफ के लिए किसी तरह का कोई कदम उठती हुई नजर नहीं आ रही है।जबकि हकीकत यह है कि देश में तलाकशुदा महिलाओं से बड़ी समस्या उन महिलाओं की है, जिन्हें परित्यक्त कर दिया गया है।

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आंकड़े 2011 के, 6 साल हालात और खराब

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक 23 लाख महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें बिना तलाक के ही छोड़ दिया गया है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या हिंदू महिलाओं की है, जबकि मुस्लिम महिलाओं की संख्या काफी कम है।

देश में करीब 20 लाख ऐसी हिंदू महिलाएं हैं, जिन्हें बिना तलाक के ही पति ने अपने अलग कर दिया गया है और छोड़ दिया। वहीं, मुस्लिमों में ये संख्या 2 लाख 8 हजार, ईसाइयों में 90 हजार और दूसरे अन्य धर्मों की 80 हजार महिलाएं हैं। ये महिलाएं बिना पति के रहने को मजबूर हैं। सोचने वाली बात यह है कि यह आंकड़े 2011 के हैं 2017 समाप्त होते तक और बढ़ गए होंगे।

क्या कहते हैं आंकड़े

अगर बिना तलाक के अलग कर दी गईं और छोड़ी गई औरतों की संख्या का औसत देखें, तो हिंदुओं में 0.69 फीसदी, ईसाई में 1.19 फीसदी, 0.67 मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यों (जैन, सिख, पारसी, बौद्ध) में 0.68 फीसदी है। इस तरह से देखा जाए तो मुस्लिमों में बिना तलाक के छोड़ी गई महिलाएं दूसरे धर्म की तुलना में काफी कम है।

न मायके में ठिकाना, न ससुराल में पूछ

इन परित्यक्ता के हालत काफी दयनीय है। ये महिलाओं के दर दर के ठोकरे खाने के लिए मजबूर हैं। इन्हें अपने ससुराल और मायके दोनों जगह मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इनको दोनों जगह से ठुकराया जा रहा है।

कोई भी इनको अपनाने तक को तैयार नहीं है। इनकी चिंता न तो सत्ताधारी भाजपा को है और न ही विपक्षी दलों को। जबकि इन महिलाओं को पति के रहते हुए भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।

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