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ट्रिपल तलाक है मुसलमानों के लिए आस्था

अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं।

ट्रिपल तलाक है मुसलमानों के लिए आस्था

तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार 16 मई को सुनवाई शुरू करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से उनके वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक पिछले 1400 सालों से जारी है, इसे किस आधार पर असंवैधानिक कहा जा सकता है।

सिब्बल ने इस मामले में अयोध्या के राम मंदिर का हवाला देते हुए कहा कि अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं।

जिस ने सु्प्रीम कोर्ट ने एआईएमपीएलबी से सवाल पूछा कि क्या इस्लाम में ई-डिवोर्स और व्हाट्सएप के जरिए तलाक हो सकता है क्या इस्लाम में इससे सम्बंधित कोई प्रावधान है।

एआईएमपीएलबी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ‘ट्रिपल तलाक’ कोई मसला नहीं है, मसला पितृसत्तात्मक का है। हर पितृसत्तात्मक समाज में इस तरह का भेदभाव होता है, चाहे वह हिन्दू हो या मुस्लिम या पारसी या कोई और।

जबकि ट्रिपल तलाक मामले में केंद्र सरकार की ओर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बोर्ड को अपने उस बयान पर माफी मांगनी चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि पुरुषों में निर्णय लेने की क्षमता महिलाओं के मुकाबले अधिक होती है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड को यह बयान वापस लेना चाहिए और माफी मांगना चाहिए। उन्होंने कहा यदि बोर्ड ऐसा नहीं करता है तो अदालत को कार्रवाई करनी चाहिए।

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