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जानें तीन तलाक के पीछे छिपे शर्मनाक इतिहास के बारे में

क्यों मुस्लिमों का एक तलाक से काम नहीं होता ?

जानें तीन तलाक के पीछे छिपे शर्मनाक इतिहास के बारे में
नई दिल्ली. इस दिनों हर किसी की जुब्बान पर एक ही शब्द सुनने को मिल रहा है और वो हैं ट्रिपल तलाक। आखिर क्या है ये ट्रिपल तलाक और कहां से इसकी शुरूआत हुई। वैसे तो हर धर्म का अपना एक अलग इतिहास छुपा है कि कौन सी चीज कहां से हुई और उसकी क्या जरुरत थी। क्यों मुस्लिमों का एक तलाक से काम नहीं होता ? दुनिया में कई ऐसे देश भी हैं जहां पर तीन तलाक की प्रथा नहीं है।
सबसे पहले शुरूआत से शुरू करते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कुरान में प्रयोग किए गए दो शब्दों का “हलाल” और “हलाला” ? ये शब्द बहुत आम हैं लेकिन इन दोनों शब्दों का मतलब उतना ही गहरा है। जब एक मुसलमान धर्म के नाम पर निर्दोष जानवर की गर्दन काट देता है तो इसे कहते हैं हलाल। जिससे अल्लाह को खुश करने के लिए ऐसा करने के पीछे का कारण बताया जाता है। हलाल शब्द तो आपने कई बार सुना होगा पर क्या आप इस हलाल से मिलते जुलते शब्द हलाला का मतलब जानते हैं ? इस शब्द का मतलब बहुत कम लोग जानते हैं क्योंकि ये शब्द जुड़ा है मुसलमानों के वैवाहिक जीवन और महिलाओं के खिलाफ नफरत से, नफरत भी ऐसी जिसने आज तक औरतों के जीवन में मातम का माहौल बना रखा है। मुसलमानों में 2 या 3 बीबी रखने का कानून भी है।
हलाला शब्द का अर्थ है औरतों के खिलाफ कुछ मुस्लिमों की नफरत जिसके कारण ये तीन तलाक का कानून बना है, इस बात को ठीक से समझने के लिए मुस्लिम धर्म में औरतों की हालत को समझना जरूरी है। औरतों के खिलाफ नफरत की वजह से पति के द्वारा किए गए हर गुन्हा के लिए औरतों को सजा देने का प्रावधान है। विवाह करके साथ रह रहे पति पत्नी में गलती किसी की भी हो सजा औरत को ही मिलती है। पति द्वारा तलाक देने के कई तरीके हो सकते हैं। कई बार एक पति गुस्से में आकर अपनी पत्नी से “तलाक तलाक तलाक” बोल देता है जिसके बाद दोनों के बीच का सम्बन्ध खत्म हो जाता है।
अब ऐसे में मुसीबत आती है उन महिलाओं की जिनके पति अनजाने में गुस्से में आकर उन्हें तलाक देते हैं। जिसके बाद उन महिलाओं का अपने पति के साथ वापस आने के लिए इस नियम से गुजरना होता है। इसके लिए कुछ ऐसा नियम बने हैं जो औरतों के लिए काफी शर्मनाक है और एक औरत के लिए रूह को भेदने वाला है। तलाक हुई बीवी को वापिस अपनाने के लिए औरत को किसी गैर मर्द के साथ शादी करनी होती है। बात यही खत्म नहीं होती बीवी को अपने नए पति के साथ सोना पढ़ता है। जरा सोचिए एक औरत को अपने पति के गलती से बोले गये तीन शब्दों की भरपाई के लिए किसी और के साथ सोना होता है। इसके लिए आयत में एक शब्द है “तुह्ल्लिल लहु” जिसका अर्थ मुसलाम बताते हैं शादी।
हालांकि इस शब्द का असली अर्थ है सेक्सचुअल इंटरकोर्स। एक औरत के लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी जब उसे किसी गैर मर्द के साथ सोना पड़े। ऐसे में मौज लेते हैं मौलवी जो इस प्रक्रिया में शामिल रहते हैं। तलाक के बाद अपने पति को वापिस पाने की विधि में एक औरत सबसे ज्यादा परेशानियों को झेलती है ऐसे में मौलवी सहाब की मौज आती है।
वापस अपनी पत्नी को पान के लिए ऐसे में पति अपनी पत्नी के लेकर मौलवी साहब के पास जाता है। मौलवी साहब मुझे मेरी बीवी जिसको मैंने गुस्से में तलाक दे दिया था वापिस चाहिए। मौलवी जी कहते हैं बिना हलाला के ये मुमकिन नहीं है। अब समस्या ये है एक तलाकशुदा औरत से कौन शादी करेगा? ऐसे में बूढ़े मौलाना हलाला के नाम पर ना जाने कितने निकाह करते हैं और एक रात के बाद वापिस औरत को उसके पुराने पति के पास भेज देते हैं । हलाला का अर्थ आपको समझ आ गया होगा।

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