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ट्रिपल तलाक: अगर शौहर गया जेल तो कौन उठाएगा खर्च?

केंद्र सरकार तीन तलाक पर बिल ला रही है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैर-संवैधानिक करार दिए जा चुके ट्रिपल तलाक देने वालों को 3 साल तक कैद की सजा का प्रावधान होगा।

ट्रिपल तलाक: अगर शौहर गया जेल तो कौन उठाएगा खर्च?

केंद्र सरकार तीन तलाक पर बिल ला रही है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैर-संवैधानिक करार दिए जा चुके ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देने वालों को 3 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है।

लेकिन कानूनी जानकारों का ये भी कहना है कि तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं के संरक्षण के लिए कानून में ठोस प्रावधान की जरुरत है। क्योंकि ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि तलाक देने वाले पति को जब जेल भेज दिया जाएगा तो पूरे परिवार पर इसका असर पड़ेगा।

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पति के जेल जाने पर कौन उठाएगा खर्च

सुप्रीम कोर्ट के वकील एम. एल. लाहौटी के अनुसार, सरकार 'मुस्लिम विमिन प्रोटेक्शन ऑन राइट्स ऑफ मैरिज' बिल ला रही है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल कैद की सजा हो सकती है। लेकिन इसके बाद अहम सवाल यह उठता है कि महिला और उसके परिवार के खर्चे कहां से और कैसे पूरे होंगे।

अगर आरोपी पति किसी नौकरी में है और वह जेल जाता है तो सबसे पहले नियम के तहत उसे नौकरी से निलंबित कर दिया जाएगा। अगर पति स्वरोजगार में है तो भी उसकी आमदनी बंद हो जाएगी।

ऐसी सूरत में पीड़ित महिला और बच्चों का खर्च कौन उठाएगा। साथ ही ये भी सवाल उठ रहे हैं कि कहीं महिला इसी डर से कि उसकी और बच्चों की परवरिश कैसे होगी, ऐसे मामलों में सामने आने से कतराने न लगे। क्योंकि मामला पारिवारिक विवाद का है इसलिए पति के जेल जाने पर उस पर निर्भर रहने वाली महिला बैकफुट पर आ जाएगी।

शाहबानों के केस केे बाद बना था कानून

हाईकोर्ट के वकील एम. एस. खान के मुताबिक, शाह बानो केस के बाद सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण कानून, 1986) का गठन किया था। इस कानून के तहत एक मुस्लिम तलाकशुदा महिला इद्दत के बाद अपना गुजारा करने के लिए पति के संबंधियों को गुजारा भत्ता देने के लिए कोर्ट में गुहार लगा सकती है।

इन संबंधियों में वो लोग होंगे जो मुस्लिम कानून के तहत उसके उत्तराधिकारी होंगे। यदि ऐसा कोई रिश्तेदार नहीं हैं तो ऐसी सूरत में वक्फ बोर्ड गुजारा भत्ता देगा।

वकील का कहना है कि मौजूदा तीन तलीक मामले में 1986 का यह कानून भी लागू नहीं होगा क्योंकि वह तलाक के बाद की स्थिति में गुजारा भत्ता के लिए बनाया गया था।

मुस्लिम महिलाएं कोर्ट में लगा सकती हैं गुहार

वैसे मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है और खुद और बच्चों की परवरिश के लिए पति के खिलाफ गुजारा भत्ता पाने के लिए कोर्ट में गुहार लगा सकती है।

लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि जब पति ही जेल में होगा और उसकी आमदनी प्रभावित होगी तो वह गुजारा भत्ता देगा भी कैसे। इसलिए ऐसे मामले में महिला के प्रोटेक्शन के लिए कानून में स्पष्टता होना भी जरूरी है, जिसके तहत महिला को इस बात का डर नहीं होना चाहिए कि पति के जेल जाने के बाद उसका गुजारा कैसे चलेगा। तभी महिलाएं सामने आकर पुलिस के सामने शिकायत कर पाएगी।

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