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शीतकालीन सत्र समाप्तः कांग्रेस की राजनीति की भेंट चढ़ा #TripleTalaqBill, पीड़ित महिलाओं ने किया विरोध

संसद का शीतकालीन सत्र आज शुक्रवार को समाप्त हो गया। लेकिन इस सत्र में तीन तलाक के खिलाफ लाया गया मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) बिल 2017 पास नहीं हो सका।

शीतकालीन सत्र समाप्तः कांग्रेस की राजनीति की भेंट चढ़ा #TripleTalaqBill, पीड़ित महिलाओं ने किया विरोध

संसद का शीतकालीन सत्र आज शुक्रवार को समाप्त हो गया। लेकिन इस सत्र में तीन तलाक के खिलाफ लाया गया मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) बिल 2017 पास नहीं हो सका। हालांकि यह बिल लोक सभा में तो पास हो गया था लेकिन राज्यसभा में कांग्रेस ने इस बिल का समर्थन नहीं किया।

राज्यसभा में बिल पास न होने की वजह से तलाक से पीड़ित महिलाओं ने कांग्रेस का विरोध किया और प्रधानमंत्री मोदी को बिल लाने के लिए धन्यवाद दिया। पीड़ित महिलाओं ने कहा कि हम कांग्रेस का विरोध करते हैं। महिलाओं ने संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।
तलाक पीड़ित महिलाओं ने आरोप लगाया है कि साल 1986 में जब राजीव गांधी की सरकार ने शाह बानो केस में आए फैसले के बाद कानून बनाया था तो उसमें सिर्फ इद्दत के दौरान यानी तीन महीने के लिए ही मुस्लिम महिलाओं को मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया गया था। ऐसे में आज कांग्रेस क्यों मुआवजा पर शोर मचा रही है।
कांग्रेस मौजूदा बिल में पीड़ित महिलाओं को मुआवजे का प्रावधान करने की मांग कर रही है। इसके लिए ही कांग्रेस ने संशोधन प्रस्ताव रखा है। कांग्रेस का तर्क है कि अगर तीन साल तक किसी तलाकशुदा महिला का पति जेल चला जाएगा तो उसका गुजारा कैसे चलेगा?

कांग्रेस ने किया विरोध

कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस बिल में संशोधन की मांग करते हुए उसे सेलेक्ट कमिटी के पास भेजने की मांग की लेकिन सरकार संशोधनों के खिलाफ रही। साथ ही सरकार ने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भी नहीं भेजा। इस वजह से राज्य सभा में तीन दिनों तक हंगामा होता रहा और आखिरकार शीतकालीन सत्र समाप्त हो गया।
सत्र अपने ऐतिहासिक तीन तलाक खत्म करने संबंधी बिल को पटल पर पेश करने के लिए याद किया जाएगा। हालांकि सरकार इसी सत्र में इसे पास कराना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विरोध और मांग के कारण राज्यसभा में बिल पास नहीं करा सकी।

काफी छोटा शीत सत्र

यह सत्र काफी छोटा रहा। लोकसभा में कुल 13 बैठकें हुईं जो 61 घंटे और 48 मिनट तक चलीं। सत्र के दौरान निचले सदन में 16 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 12 विधेयक पारित हुए। राज्यसभा का सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यहां पर अंतिम दिन तक लगातार प्रयास के बावजूद सरकार के तीन तलाक पर ऐतिहासिक बिल पास नहीं करा सकी।
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