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पुणे: किन्नर को शॉपिंग मॉल में जाने रोक, कहां- कब तक पिएंगे अपमान का घूंट

एक ट्रांसजेंडर को सिर्फ इसलिए मॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली क्योंकि एंट्री पर न महिला न पुरुष कोई भी उसकी सिक्योरिटी चेकिंग के लिए राजी नहीं हुआ।

पुणे: किन्नर को शॉपिंग मॉल में जाने रोक, कहां- कब तक पिएंगे अपमान का घूंट

सुप्रीम कोर्ट द्वारा किन्नरों को तीसरे जेंडर का दर्जा दिए जाने के बाद भी समाज इन्हें हीनता की दृष्टि से देखते है। लोगों द्वारा किन्नरों के साथ सार्वजानिक स्थान पर आज भी भेदभाव किया जाता है।

पुणे के शॉपिंग मॉल में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। पुणे के मॉल में एक ट्रांसजेंडर को सिर्फ इसलिए प्रवेश की अनुमति नहीं मिली क्योंकि एंट्री पर कोई भी महिला या पुरुष उनकी सिक्योरिटी चेकिंग के लिए राजी नहीं हुआ।

पीड़िता ट्रांसजेंडर सोनाली के आरोप

इस घटना के बाद पीड़िता ट्रांसजेंडर सोनाली ने ये बताया कि वह विमाननगर में फीनिक्स मार्केट सिटी मॉल में गुरुवार को गई थी, जहां उसे जांच के लिए महिलाओं के सुरक्षा कक्ष में जाने को कहा गया।
मॉल के अधिकारियों ने सोनाली से कहा कि उनकी पॉलिसी ट्रांसजेंडर्स को अंदर आने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा, 'जब मैंने उनसे अपनी पॉलिसी को समझाने के लिए कहा, तब उन्होंने चुप्पी साध ली। अब मैं खिलाफ केस दर्ज करूंगी।'

आखिर कब थर्ड जेंडर को मिलेगा सम्मान

आपको बात दें कि आज थर्ड जेंडर कहीं पुलिस की वर्दी में नजर आ रहें है, कहीं न्यायधीश की कुर्सी पर बैठा है, तो कोई राजनीति गलियारों में अपने हौसलों की मिसाल दे रहा है।
इनसब के बावजूद भी जब किसी किन्नर को किसी शॉपिंग मॉल में जाने से रोका जाता है, तो सवाल उठता हैं कि आखिर कब थर्ड जेंडर को सम्मानजनक जिंदगी मिलेगी, क्या इन्हें थर्ड जेंडर का दर्जा देना ही काफी है?
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