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GST: आम आदमी से लेकर व्यापारियों तक की समझ से परे टैक्स स्लैब

सरकार का मानना है कि जीएसटी लागु होने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में 0.4 फीसदी का इजाफा होगा।

GST: आम आदमी से लेकर व्यापारियों तक की समझ से परे टैक्स स्लैब

देश में नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को लागू किए जाने में अभी 48 घंटे की देर है। पर कारोबारी अपने आपको इसके लिए तैयार नहीं पा रहे हैं।

कारोबारी जीएसटी के मुताबिक अपने बिजनेस को व्यवस्थित करना के लिए कुछ और वक्त चाहते है। जो देश में अब तक के सबसे बड़े इनडायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म से मुश्किल झेल रहे हैं।

सरकार इस सुधार के जरिए 2 ट्रिलियन डॉलर और 1.3 अरब लोगों की अर्थव्यवस्था को कॉमन मार्केट में तब्दील करना चाहती है। लेकिन, कई कारोबारियों की समस्या है कि 1 जुलाई से जीएसटी की व्यवस्था के तहत ऑनलाइन टैक्स भरने के लिए पूरे इंतजाम नहीं हैं।

जीएसटी में इन्हें हर महीने ऑनलाइन ही टैक्स चुकाना होगा। कारोबारियों को एक अकाउंटेंट हायर करना होगा और एक कंप्यूटर भी लेना पड़ेगा।

सरकार का कहना काम आसान होगा

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी के जरिए कारोबारियों का काम आसान होगा यहां तक कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी सरकारी विज्ञापन में इसे ‘एक देश, एक टैक्स और एक मार्केट’ स्थापित करने वाला करार दे रहे हैं।

इतना आसान नहीं

भारत के 29 राज्यों के टैक्स की व्यवस्था का एकीकरण करने वाले जीएसटी से बड़ी कंपनियों का कामकाज आसान हो जाएगा। एचएसबीसी का अनुमान है कि इससे देश की इकॉनमिक ग्रोथ में भी 0.4 प्रतिशत का इजाफा होगा।

दूसरी तरफ 6,500 छोटे कारोबारियों के संगठन इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के बीच इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि जीएसटी का सामना कैसे किया जाए।

वोल्टेज स्टेबलाइजर्स बनाने वाली कंपनी के मालिक और एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक मल्होत्रा ने कहा, ‘शुरुआती महीनों में जीएसटी को लेकर कई तरह के भ्रम हो सकते हैं।’

टैक्स स्लैब पर पसोपेश में हैं कारोबारी

इसके अलावा सबसे बड़ी चिंता जीएसटी के स्लैब की जटिलता को लेकर है। इसके तहत 5, 12, 18 और 28 का स्लैब तय किया गया है। लेकिन, प्रोडक्ट्स की कैटिगरी लिस्ट इतनी लंबी है कि कारोबारियों के लिए इसे समझना आसान नहीं है।

जीएसटी रेट्स का ऑफिशल शेड्यूल 213 पेज का है, जिसमें अब तक कई बार बदलाव किए जा चुके हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के स्थानीय सचिव अनुराग अग्रवाल ने कहा, ‘रबर गुड्स पर 12 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि स्पॉर्टिंग गुड्स पर 18 फीसदी कर लगेगा। मैं रबर स्पॉर्टिंग शूज बनाता हूं। ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि इस पर किस कैटिगरी के तहत टैक्स लगेगा।’

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