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स्वच्छता का असली हीरो, बनवा डाले 2 लाख से ज्यादा टॉयलेट

इन्होंने देश में स्वच्छता को लेकर काफी काम किया है

स्वच्छता का असली हीरो, बनवा डाले 2 लाख से ज्यादा टॉयलेट
नई दिल्ली. टॉयलेट मैन ऑफ इंडिया ईश्वर पटेल कहते हैं कि शौचालय का निर्माण कराना आसान काम है लेकिन असल काम है लोगों की सोच में बदलाव लाना। पटेल के मुताबिक, सॉफ्टवेयर से ज्यादा महत्वपूर्ण हार्डवेयर होता है। 12 साल की उम्र में ईश्वर पटेल गांधी के सेवादल से एक स्वयं सेवक के रूप में जुड़े।

उन्होंने देखा कि मैला ढोने वाले लोगों के समुदाय में एक तरह की पाबंदी है। ये देश के सबसे पिछड़े और शोषित लोग हैं। यह सब देख कर आहत ईश्वर पटेल ने फैसला किया कि वे अपना जीवन भारत की स्वच्छता की स्थिति को बेहतर बनाने में लगाएंगे। इसके अलावा देश से 'छूआछूत' को खत्म करेंगे।

हालंकि आज के समय में यानी 21वीं शताब्दी में भी दुनियाभर में 2.6 अरब लोगों के पास शौचालय नहीं है। यहां तक की गंगा नदी में हर मिनट 11 लाख लीटर सीवेज का पानी बहाया जा रहा है। ये संख्या आपको काई ज्यादा लग रही होंगी, लेकिन ईश्वर पटेल के अथक प्रयासों ने भी एक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 2 लाख शौचालयों का निर्माण करवाया है। इन शौचालयों का निर्माण गांधी आश्रम में 'सफाई विद्यालय' इनिशिएटिव के तहत कराया गया। इसके साथ ही 118 संगठनों को देशभर में स्वच्छता की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगाया गया।

द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने ऑफिस के बाहर ईश्वर पटेल ने 'टॉयलेट पार्क' बनवाया है। इस पर पटेल कहते हैं कि लोगों के पास रोज (गुलाब) गार्डन होते हैं लेकिन हमारे यहां 'टॉयलेट गार्डन' है। ईश्वर पटेल गुजरात हरिजन सेवक संघ के प्रेसिडेंट रह चुके हैं। इसके अलावा वे साबरमती हरिजन आश्रम ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी भी रह चुके हैं। साथ ही इन्वायरमेंटल सैनिटेशन इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।

ईश्वर पटेल के किफायती टॉयलेट डिजाइन को कई विकासशील देशों ने भी अपनाया है। उन्हें कई बड़े अवार्ड्स भी मिले हैं जिनमें पद्मश्री से लेकर महात्मा गांधी अवार्ड् शामिल हैं। ईश्वर पटेल की मृत्यु 26 दिसंबर, 2010 को हो गई। उनसे लगाव और प्यार करने वाले लोगों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम यात्रा में शामिल होने हजारों की संख्या में लोग आए थे।
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