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ट्रेड यूनियनों की राष्‍ट्रव्‍यापी हड़ताल, ये हैं 8 अहम बातें

निजी बैंकों के 6 कर्मचारी संगठनों ने भी हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है।

ट्रेड यूनियनों की राष्‍ट्रव्‍यापी हड़ताल, ये हैं 8 अहम बातें
नई दिल्ली. केंद्रीय श्रम संगठनों (सीटू) की देशव्यापी हड़ताल के कारण शुक्रवार को बैंक सेवाएं, टेलीकॉम और नागरिक यातायात सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इस हड़ताल में 10 केंद्रीय श्रम संगठनों ने शामिल होने का ऐलान किया है। सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है।
1. श्रम संगठनों ने ऐलान किया है कि इस साल की हड़ताल श्रमिकों की संख्या के लिहाज से पिछली हड़तालों से बड़ी होगी। संगठनों का दावा है कि हड़ताली में शामिल श्रमिकों की संख्या 18 करोड़ तक जा सकती है। यह पिछले साल की हड़ताल से अधिक है, उसमें 14 करोड़ श्रमिक शामिल हुए थे।
2. बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्‍टरियां बंद रहेंगी। कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में भागीदारी का फैसला किया है। इसके कारण सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ सकता है।
3. कोयला और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि पावर प्‍लांटों के संचालन के लिए पर्याप्‍त कोयला है। यदि अगले 50 से 60 दिनों में भी खनन नहीं होता तो भी पावर प्‍लांट इससे प्रभावित नहीं होंगे।
4. मौजूदा वित्‍तीय वर्ष में सरकार ने निजीकरण और कुछ कंपनियों को बंद करके करीब 55,907 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। सरकार की ओर से संचालित 77 कंपनियों को घाटा बढ़कर 26, 700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
5. ट्रेड यूनियनें सरकारी पेंशन फंड और स्‍टॉक मार्केट में अधिक पैसा लगाने के सरकार के दिशानिर्देशों का भी विरोध कर रही हैं।
6. बीजेपी के वैचारिक संगठन, आरएसएस से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं हो रहा है। सरकार की ओर से संचालित कोल इंडिया लिमिटेड के कर्मचारी भी शुक्रवार की हड़ताल में शामिल होंगे।
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