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स्वतंत्रता सेनानी श्री देव सुमन की शहादत के लिए युगों तक याद करेगा भारत

उन्होंने न केवल अंग्रेजों का विरोध किया बल्कि टिहरी रियासत के गढ़वाल राजा का भी विरोध किया।

स्वतंत्रता सेनानी श्री देव सुमन की शहादत के लिए युगों तक याद करेगा भारत
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देहरादून. श्री देव सुमन की आज पुण्यतिथि है, उनका जन्म 25 मई 1916 को टिहरी गढ़वाल में हुई थी जो अभी उत्तराखंड में हैं। ,वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय नेता थे। उन्होंने न केवल अंग्रेजों का विरोध किया बल्कि टिहरी रियासत के गढ़वाल राजा का भी विरोध किया। उनकी पूरी राजनीति महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्य के सिद्धांत से प्रभावित था। उन्होंने टिहरी के राजा बोलंदा बद्रीनाथ से पूरी आजादी की मांग की थी जिससे नाराज होकर राजा ने उन्हें विद्रोही घोषित कर दिया तथा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जहां पर उन्हें काफी प्रताड़ना दी गई। उन्हें इस तरह का खाना दिया जाता था जो खाने लायक नहीं होता था जिससे तंग आकर उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। इन्होंने 84 दिन तक लगातार अनशन किया जिसके बाद 25 जुलाई 1944 को उनकी मौत हो गई।

राजा की क्रूरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके शरीर का दाह संस्कार भी नहीं किया गया और ऐसे ही नदी में डाल दी गई। उन्होंने अपने राज्य से इतना प्रेम था कि उन्होंने लिखा कि मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि मैं जहां अपने भारत देश के लिेए पूर्ण स्वाधीनता के ध्येय में विश्वास करता हूं और मैं चाहता हूं कि महराजा की छत्रछाया में उत्तरदायी शासन जनता को प्राप्त हो,हां मैंने प्रजा की भावना के विरूद्ध काले कानूनों और कार्यों की अवश्य आलोचन की है और मैं इसे प्रजा का जन्मसिद्ध अधिकार समझता हूं। इनकी शहादत का जनता पर बहुत प्रभाव पड़ा जिसके बाद राजशाही के खिलाफ खुला विद्रोह हुआ,इनके बलिदान के बाद जनता के आन्दोलन ने टिहरी रियासत को प्रजामण्डल को वैधानिक करार प्रदान किया।

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