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चीनी राष्ट्रपति के भारतीय दौरे के समय लद्दाख में घुसपैठ एक रहस्य है: वायुसेना प्रमुख

आठ को मनाए जाने वाले वायुसेना दिवस के पूर्व में आयोजित संवाददाता सम्मलेन में बोले वायुसेना प्रमुख

चीनी राष्ट्रपति के भारतीय दौरे के समय लद्दाख में घुसपैठ एक रहस्य है: वायुसेना प्रमुख
नई दिल्ली. राजधानी में 8 अक्टूबर को मनाए जाने वाले वायुसेना दिवस के पूर्व में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मलेन में वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने कहा कि पिछले महीने राष्ट्रपति शी चिनफिंग के दौरे के समय लद्दाख में चीन की घुसपैठ के ‘‘कुछ संकेत’’ हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा के पास रक्षा ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है।
साथ लद्दाख से लगी हुई देश की पश्चिमी सीमा को भारत अपने दो प्रमुख प्रतिद्धंदी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ साझा करता है।1962 के भारत-चीन युद्ध से लेकर 1999 में पाकिस्तान के साथ हुए करगिल युद्ध की वजह से भी यह सीमा भारत के लिए सामारिक और रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकार की योजना देश की सीमा पर मौजूद सामरिक ठिकानों के इंफ्रासचक्टर को आधुनिक और उन्नत बनाने की है। इसमें पश्चिमी सीमा पर मौजूद वायुसेना के बेहद पुराने पड़ चके एडवांस लैडिंग ग्राउंडस (एएलजी) करगिल और नियोमा भी शामिल हैं। वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल अरूप राहा ने हरिभूमि द्वारा इस बाबत पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में कहा कि लद्दाख में पश्चिमी सीमा पर चीन के साथ एलएसी के बेहद करीब मौजूद नियोमा एडवांस लैडिंग गा्रउंड और पाकिस्तान से लगी सीमा से सटे करगिल एडवांस लैडिंग ग्राउंड के उन्नतीकरण कार्य में कुछ और वक्त लगेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों सामारिक और रणनीतिक लिहाज से वायुसेना के लिए बेहद अहम ठिकाने हैं। नियोमा में उन्नतीकरण का कुछ कार्य शुरू हुआ है लेकिन इसे पूरी तरह से ऑपरेशनल होने में लगभग 5 साल का समय और लगेगा। नियोमा चीन से लगी सीमा से मात्र 23 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस एएलजी पर होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चीन की पैनी नजर रहती है। इसके अलावा करगिल एएलजी में अभी काम की शुरूआत नहीं हुई है।
वायुसेना को यहां कुछ दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से एएलजी के उन्नतीकरण कार्य से जुड़ी परियोजना के लिए धन मुहैया कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। करगिल एएलजी को वायुसेना की योजना वर्ष 2016 तक पूरी तरह से उन्नत एयरबेस बनाने की है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, वायुसेना की 82वीं वषर्गांठ-

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