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देश में बढ़ी टाइगर की संख्या, इन दो प्रोजेक्ट ने की सरकार की मदद

बॉलीवुड के लिए टाइगर जिंदा है लेकिन क्या घने जंगलों-वनों में टाइगर जिंदा है। क्या वाकई में अब भी पर्यावरण मे टाइगरों की प्रजाति लुप्त नही हुई है। क्या हमने या आप में से किसी ने टाइगरों को देखा है। इसी सवाल और सोच को लेकर 1 अप्रैल 1973 को उत्तराखंड के कार्बेट नेशलन पार्क ने ''बाघ बचाओं'' अभियान की शुरुआत की। बाघ एक जंगली जानवर है जिसे भारत सरकार द्रारा राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया गया था। कई रंगों वाला चीता दिखने मे जितना शांत होता है। लेकिन उसकी चाल उतनी ही तेज़ होती है। लेकिन इनकी संख्या में थोड़ा इजाफा देखा जा रहा है।

देश में बढ़ी टाइगर की संख्या, इन दो प्रोजेक्ट ने की सरकार की मदद

बॉलीवुड के लिए टाइगर जिंदा है लेकिन क्या घने जंगलों में टाइगर जिंदा है। क्या वाकई में अब भी पर्यावरण मे टाइगरों की प्रजाति लुप्त नहीं हुई है। क्या हमने या आप में से किसी ने टाइगरों को देखा है। इसी सवाल और सोच को लेकर 1 अप्रैल 1973 को उत्तराखंड के कार्बेट नेशलन पार्क ने 'बाघ बचाओं' अभियान की शुरुआत की।

बाघ एक जंगली जानवर है जिसे भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया गया था। कई रंगों वाला चीता दिखने मे जितना शांत होता है। लेकिन उसकी चाल उतनी ही तेज़ होती है। लेकिन इनकी संख्या में थोड़ा इजाफा देखा जा रहा है।

बाघों की संख्या

कैंद्र सरकार में तत्कालिक पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत मे बाघों की संख्या बढ़कर 2500 हो गई है। इससे पहले साल 2011 में वन विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि पिछले चार सालों में बाघों की संख्या 1411 से बढ़कर 1706 हो गई थी। लेकिन फिर भी इनकी संख्या में काफी कमी देखी जा रही है। फिर चाहें हम पहले के आंकड़ों को भी देखें। जहां हमने इनकी संख्या में थोड़ा इजाफा देखा है।

बाघों की संख्या में कमी के कारण

वन क्षेत्रों की कमीः पशुओं के लिए काम करने वाली संस्था वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 8 सालों में बाघों का वन क्षेत्र 1803 वर्ग किमी घट गया। 2006 में यह 93,697 वर्ग किमी था और 2014 में 92,164 रह गया।

जंगली शिकारीः सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाघों की हड्डियों से दवाईयाँ बनती है। एशिया के कई देश इसके खरीददार है।

ग्लोबल वार्मिंगः दुनिया मे बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग भी बाघों की संख्या की कमी के सबसे बड़े कारण है। जहां इंसानों का जीवित रहना मुश्किल हो रहा है तो फिर क्लाइमेट चेंज पशुओं पर गहरा प्रभाव छोड़ रहा है।

सरकार की योजना

इंदिरा गांधी की सरकार ने साल 1973 मे बाघों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए “प्रोजेक्ट टाइगर” योजना की शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य लुप्त प्रजातियों का संरक्षण करना था।

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