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तो इस वजह से समाजवादी पार्टी में बढ़ा विवाद

मुलायम ने साफ-साफ अखिलेश यादव को किनारे कर शिवपाल यादव को तरजीह दी थी।

तो इस वजह से समाजवादी पार्टी में बढ़ा विवाद
लखनऊ. यूपी में चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी बिखर चुकी है। समाजवादी पार्टी के भीतर पिछले काफी वक्‍त से चल रहे विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया, जब मुलायम सिंह यादव ने अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों की खातिर बुधवार को पार्टी के 325 उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट जारी की थी। इस लिस्‍ट के जरिए मुलायम ने साफ-साफ अखिलेश यादव को किनारे कर शिवपाल यादव को तरजीह दी थी।
अखिलेश के कई करीबी मंत्रियों के टिकट काट दिए
इस फेहरिस्त में जहां अखिलेश के कई करीबी मंत्रियों के टिकट काट दिए गए, वहीं कई ऐसे नाम शामिल किए गए थे जिन पर अखिलेश को ऐतराज था। साथ ही पार्टी की सूची में उन नौ पूर्व मं‌त्रियों को टिकट दिया गया था, जिन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। इनमें खुद प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और उनके करीबी ओम प्रकाश सिंह, नारद राय, शादाब फातिमा शामिल हैं। इसके अलावा शिव कुमार बेरिया, राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, योगेश प्रताप सिंह, राज किशोर सिंह और मनोज पारस भी शामिल थे।
नाखुश अखिलेश ने बगावत कर दी
मुलायम के इस कदम से नाखुश अखिलेश ने बगावत कर दी थी। गुरुवार देर शाम उन्होंने 235 उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट जारी कर दी थी। इसे साफ तौर पर समाजवादी पार्टी में दो-फाड़ के तौर पर देखा गया था। अखिलेश की इस लिस्‍ट में मुलायम की ओर से जारी सूची से 32 नाम अलग थे। बाकी की सीटों पर उन्हीं प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया गया, जो मुलायम की लिस्ट में थे। अखिलेश के पसंद के उम्मीदवारों में 171 मौजूदा विधायक और 64 नए उम्‍मीदवार थे।
अखिलेश के बाद शिवपाल यादव अपनी लिस्‍ट लेकर हाजिर
समाजवादी पार्टी की कलह यहीं पर नहीं रुकी। मुलायम और अखिलेश के बाद शिवपाल यादव अपनी लिस्‍ट लेकर हाजिर हो गए। गुरुवार देर रात शिवपाल ने 68 उम्‍मीदवारों की अपनी लिस्‍ट जारी कर दी। इन सारे कदमों से समाजवादी पार्टी दो धड़ों में बंट गई। एक तरफ मुलायम और शिवपाल थे तो दूसरी तरफ अखिलेश और रामगोपाल यादव।
विरोध करने वालों की कोई औकात नहीं
रिपोर्टों के मुताबिक, रामगोपाल ने तो यहां तक कह दिया था कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है और शिवपाल पर निशाना साधते हुए उन्‍होंने कहा था कि एक शख्स की वजह से सारी समस्याएं हो रही हैं। रामगोपाल ने कहा था कि अखिलेश की लिस्ट ही फाइनल है और विरोध करने वालों की कोई औकात नहीं है।
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