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इस वजह से कोई नहीं बेचता है प्लास्टिक के चावल, जानिए इसका वायरल सच

ऐग्रीकल्चरल साइंस यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के मुताबिक जिन चावलों को प्लास्टिक का बताया जा रहा है उनमें प्लास्टिक का कोई तत्व नहीं है।

इस वजह से कोई नहीं बेचता है प्लास्टिक के चावल, जानिए इसका वायरल सच

सोशल मीडिया और खबरों में कई दिन से प्लास्टिक के चावल बेचे जाने की बात कही जा रही है। खबर है कि तेलंगाना, उत्तराखंड, कर्नाटक, उत्तराखंड कई राज्यों में प्लास्टिक के चावल बिक रहे हैं।

कई लोगों ने दावा किया कि उनके घरों में जो लोग बीमार पड़ रहे हैं वो प्लास्टिक के चावल की वजह से। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या है इन प्लास्टिक के चावल के पीछे का सच।
दरअसल प्लास्टिक के चावल बिकने के दावे को यूनिवर्सिटी ऑफ ऐग्रीकल्चरल साइंस ने अपने टेस्ट में झूठा करार दिया है। इस मामले पर राइस मिल संगठनों का कहना है कि सामान्य तौर पर 40-50 रुपए किलो बिकने वाले चावल को अगर प्लास्टिक का बनाया जाए तो एक किलो चावल की लागत 200 रुपए बैठेगी। ऐसे में कोई क्यों चार गुना घाटा सहकर नकली चावल बेचेगा।
ऐग्रीकल्चरल साइंस यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के मुताबिक जिन चावलों को प्लास्टिक का बताया जा रहा है उनमें प्लास्टिक का कोई तत्व नहीं है, वे खराब क्वॉलिटी के हैं। यूनिवर्सिटी विशेषज्ञों ने बताया कि नकली या प्लास्टिक के चावल बनाना संभव नहीं है।
प्रफेसर केवी जमुना ने कहा, "चावल में मॉइसचर, प्रोटीन और फैट- तीनों थे। ये नकली चावल में नहीं हो सकते। हालांकि इन चावलों में खड़िया (चॉक) पाई गई। यह तभी पाई जाती है जब चावल खराब क्वॉलिटी का हो।"
कर्नाटक के राइस मिल असोसिएशन के जनरल सेक्रटरी ने एन श्रीनिवार राव के मुताबिक प्लास्टिक के चावल बनाए ही नहीं जा सकते।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली के फूड विभाग ने अलग-अलग जगहों से चावलों के 27 सैंपल की जांच की। विभाग ने कहा कि चावलों में प्लास्टिक नहीं पाई गई लेकिन इनमें मिलावट पाई गई।
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