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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवसः ‘गरीब परिवारों की 30 फीसदी लड़कियों ने स्कूल में कभी नहीं रखा कदम''

भारत में लड़कियों की शिक्षा की परिस्थिति को ‘‘खतरनाक'''' बताते हुए आरटीई फोरम के राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश राय ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में गरीब परिवारों की करीब 30 फीसदी लड़कियों ने कभी किसी कक्षा में कदम तक नहीं रखा।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवसः ‘गरीब परिवारों की 30 फीसदी लड़कियों ने स्कूल में कभी नहीं रखा कदम

भारत में लड़कियों की शिक्षा की परिस्थिति को ‘‘खतरनाक' बताते हुए आरटीई फोरम के राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश राय ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में गरीब परिवारों की करीब 30 फीसदी लड़कियों ने कभी किसी कक्षा में कदम तक नहीं रखा।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर एक बयान में राय ने कहा कि भारत में छह करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। उन्होंने कहा, ‘‘यह दुनिया में किसी भी देश में स्कूल ना जाने वाले बच्चों की सबसे अधिक संख्या है। करीब 25 फीसदी लड़के और लड़कियां दूसरी कक्षा की किताब पढ़ नहीं पाते।

उन्होंने कहा कि करीब 36 फीसदी लड़कियां और 38 फीसदी लड़के अंग्रेजी में अक्षर नहीं पढ़ पाते। करीब 42 फीसदी लड़कियां और 39 फीसदी लड़के अंकगणित के सामान्य घटाव के सवाल हल करने में अक्षम हैं।'

अधिकारी ने कहा, ‘‘जब पूरी दुनिया आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने जा रही है तो ऐसे में भारत में बालिका शिक्षा की स्थिति बहुत खतरनाक है। 15 से 18 साल की करीब 40 फीसदी किशोरियां किसी भी शैक्षिक संस्थान में नहीं पढ़ रहीं। गरीब परिवारों की लगभग 30 प्रतिशत लड़कियों ने कभी स्कूल में कदम तक नहीं रखा।'
इस पर निराशा जताते हुए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) फोरम के संयोजक ने कहा कि कई बच्चे जो स्कूल तक पहुंच पाए उन्हें वैसा ज्ञान और कौशल हासिल नहीं है जैसा की श्रम बाजार में प्रवेश करने के लिए जरुरत होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि शिक्षा की स्थिति पर वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़े दिखाते हैं कि माध्यमिक स्कूल के बच्चों की पढ़ने और गणित का सामान्य ज्ञान खराब है, सरकार अपने स्कूलों में पर्याप्त संसाधन निवेश करने के लिए तैयार क्यों नहीं है जैसा कि केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में किया जा रहा है? इसके लिए हम बेहतर नतीजों की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?' राय ने इस समस्या के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘आंकड़ें दिखाते हैं कि 17.5 फीसदी प्राथमिक और 14.8 फीसदी माध्यमिक शिक्षकों के पद खाली हैं। साथ ही प्राथमिक स्तर पर केवल 70 फीसदी शिक्षक ही पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित एवं योग्य हैं।' शिक्षा व्यवस्था की ओर सरकार की लापरवाही का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा पर केवल 2.7 फीसदी जीडीपी खर्च करती है।
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