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लोकसभा चुनाव 2019ः इन 7 बड़े चेहरों पर सबकी नजर, ये 5 बड़े मुद्दे होंगे

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीकों के ऐलान के साथ ही चुनावी महासंग्राम का आगाज हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाली महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। दोनों धड़ों ने चुनावी महासंग्राम में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

लोकसभा चुनाव 2019ः इन 7 बड़े चेहरों पर सबकी नजर, ये 5 बड़े मुद्दे होंगे

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीकों के ऐलान के साथ ही चुनावी महासंग्राम का आगाज हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाली महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला होगा। दोनों धड़ों ने चुनावी महासंग्राम में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे माहौल में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत देश के 7 बड़े चेहरों पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। चुनावी समर में इन नेताओं की भूमिका अहम है।

नरेंद्र मोदी

2014 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए ने नरेंद्र मोदी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। अबकी बार, मोदी सरकार का नारा दिया गया था। सोशल नेटवर्किंग साइटों का जबरदस्त प्रयोग करते हुए देश में मोदी लहर का माहौल बनाया गया था। इन पांच सालों में ढाई दर्जन से अधिक चुनाव हो चुके हैं। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी भाजपा के स्टार प्रचारक रहे हैं।

राहुल गांधी

दिसंबर 2017 में सोनिया गांधी के अध्यक्ष पद से सेवामुक्त होते ही राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। अपने पहले भाषण में उन्होंने कहा था कि हम कांग्रेस को हिंदुस्तान की ग्रांड ओल्ड एंड यंग पार्टी बनाने जा रहे हैं। अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी को 2018 के आखिर में बड़ी कामयाबी मिली जब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बाहर कर दिया।

अमित शाह

लोकसभा चुनाव 2014 में अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। उनकी अगुआई में यूपी की 80 सीटों में से एनडीए को 73 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। उसी साल जुलाई में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इन पांच सालों में 27 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 14 में जीत और 13 में हार मिली। इस बार चुनावी अभियान में अमित शाह विरोधी पार्टियों और नेताओं पर ज्यादा आक्रामक दिख रहे हैं।

प्रियंका गांधी

कांग्रेस की स्टार प्रचारक रहीं प्रियंका गांधी का सक्रिय राजनीति में बीते 23 जनवरी को पदार्पण हुआ है। उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की 41 लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी भी दी गई है। पहले जहां वह केवल अमेठी और रायबरेली में भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी के लिए प्रचार करती थीं, अब पूरे उत्तर प्रदेश के अलावे देश के अन्य राज्यों में भी करेंगी।

मायावती

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। अनुसूचित जाति से आने वाली मायावती की राजनीति में पैठ भी है और राज्य में अपना वोट बैंक भी। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव 2014 की बात करें, तो मोदी लहर के बीच बसपा खाता भी नहीं खोल पाई थी, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा है। समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर बसपा मजबूत दिख रही है।

अखिलेश

समाजवादी पार्टी में राजनीतिक कलह के बीच अखिलेश यादव ने पार्टी की कमान अपने हाथ में ली। सपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बहुत कमाल नहीं दिखा पाई थी और सिर्फ पांच सीटों पर जीती थी। इस बार 25 सालों का राजनीतिक द्वेष मिटाते हुए सपा, बसपा के साथ आई है। मायावती संग अखिलेश का आना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है।

ममता बनर्जी

भाजपा नीत एनडीए के विरोध में एकजुट हुए महागठबंधन में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनजी एक बड़ा चेहरा बन कर उभरी हैं। 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 34 सीटों पर कब्जा जमाया था। 18 जनवरी को कोलकाता में विपक्ष की बड़ी रैली आयोजित कर ममता ने 15 से ज्यादा राजनीतिक दलों को एक मंच पर इकट्ठा किया था।

इस साल होने जा रहे लोकसभा चुनाव में पांच बड़े चुनावी मुद्दे होंगे। इनमें राष्ट्रवाद,पाकिस्तान,राफेल,किसान और राम मंदिर मुख्य मुद्दे होंगे। इन मुद्दों के इर्द-गिर्द ही लोकसभा चुनाव का महासंग्राम लड़ा जाएगा। भाजपा जहां राष्ट्रवाद,राम मंदिर,पाकिस्तान, किसान और जवानों को लेकर मुखर है वहीं कांग्रेस राफेल को लेकर भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मुखर है। इन पांच मुद्दों पर ही भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व वाला महागठबंधन अपना सियासी गणित बैठाया है।

राष्ट्रवाद

राष्ट्रवाद हमेशा से ही भारतीय राजनीति में चुनावी मुद्दा रहा है। भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को लेकर हर बार कांग्रेस और दूसरी पार्टियों को घेरती है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना लिया है। पार्टी का हर नेता विपक्ष को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरता दिख रहा है।

राफेल

राफेल को लेकर कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शुरू से ही आक्रमक रही है। कांग्रेस ने राफेल को प्रमुख मुद्दा बनाया है और हर स्तर पर भारतीय जनता पार्टी को इसी मुद्दे पर घेर रही है चाहे वह संसद हो या फिर सड़क। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी हर रैलियों और भाषणों में राफेल के मुद्दे को उठा रहे हैं। ऐसे में राफेल कांग्रेस ही नहीं बल्कि दूसरी पार्टियों के लिए भी भाजपा को घेरने वाला चुनावी मुद्दा है। राहुल गांधी ने 'चौकीदार ही चोर' के जरिए राफेल को इस वक्त का सबसे अहम मुद्दा बना दिया है।

पाकिस्तान

सबसे खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना के पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को तबाह करने के बाद पिछले कुछ दिनों से 'पाकिस्तान' भी भारत में चुनावी मुद्दा बन गया है। बालाकोट में मरे आतंकियों को लेकर विपक्ष के सवाल पूछने पर भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने विपक्षी नेताओं को पाकिस्तान भेजने, 'पाकिस्तान समर्थक', 'पाकिस्तान का पोस्टर ब्वॉय' कहकर घेरने की कोशिश की है। भारतीय जनता पार्टी ने भी राष्ट्रवाद, देशभक्ति और राजनीतिक इच्छाशक्ति और सर्जिकल स्ट्राइक 2 के जरिए पाकिस्तान को चुनावी मुद्दा बनाया है।

किसान

भारतीय राजनीति में किसान वैसे तो हमेशा से ही राजनीतिक मुद्दा रहा है। लेकिन, केंद्र सरकार ने अंतरिम बजट में छोटे किसानों के खाते में हर साल 6000 रुपए डालने के एलान से इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कई चुनावी भाषणों और रैलियों में इसे अपनी सरकार का बड़ा और किसान हितैषी कदम बता चुके हैं। भाजपा के अलावा कांग्रेस भी अलग-अलग राज्यों में किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करके इस प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रही है। चाहे वह मध्यप्रदेश हो या फिर छत्तीसगढ़ यहां विधानसभा चुनावी जीतते ही कांग्रेस ने 'किसान' को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।

राम मंदिर

राम मंदिर वैसे तो बहुत लंबे वक्त से ही चुनावी मुद्दा बना हुआ है। लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव के लिए भी यह भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष दोनों के लिए प्रमुख चुनावी मुद्दा बना हुआ है। भाजपा जहां इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस को घेरती है वहीं कांग्रेस भाजपा पर राम मंदिर मुद्दे का चुनावी लाभ लेने का आरोप लगाती आई है। इसके अलावा जवान भी इस वक्त भारतीय राजनीति में चुनावी मुद्दे के तौर पर उभरा है।

आज से पूरे देश में आचार संहिता लागू

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई। आचार संहिता लागू होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियां, उम्मीदवार, सत्ताधारी पार्टियां और मंत्री-प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम करना होगा।

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