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अब सरकार जाएगी खिलाड़ियों के नजदीक, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में जाएगा खेल मंत्रालय

खेल मंत्रालय को शास्त्री भवन से हटाकर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में ले जाने का फैसला किया गया है।

अब सरकार जाएगी खिलाड़ियों के नजदीक, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में जाएगा खेल मंत्रालय

मोदी सरकार की खेलों और खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहन देने और इनके बीच नौकरशाही व राजनीति न आने के इरादे से खेल मंत्रालय को शास्त्री भवन से हटाकर जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम परिसर में ले जाने का फैसला किया है। यानि अब खिलाड़ियों को सरकार के पास नहीं, बल्कि सरकार खिलाड़ियों के पास जाएगी।

केंद्र सरकार ने आगामी 2020 के टोक्यो ओलंपिक में पदकों के लिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए हरेक कदम पर योजनाओं को कार्यान्वित किया है, वहीं खेलों के राजनीतिकरण और नौकरशाहों की अड़चनों को भी हटाने की मुहिम शुरू की है,ताकि अगले ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ी दुनिया में देश के लिए अधिक से अधिक पदक लेकर देश की शान बढ़ाए।

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विदेशों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मोदी सरकार जिस प्रकार से सम्मान दे रही है उसमें देखा गया है कि खिलाड़ियों और खेल संघों को सरकार के पास यानि खेल मंत्रालय तक पहुंच बनाने के लिए सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों की अड़चनों का सामना करना पड़ता है।

शायद इसी स्थिति में सुधार लाने की दिशा में मोदी सरकार ने भारतीय खेल प्राधिकरण, भारतीय ओलंपिक संघ को ऐसी बाधाओं से छुटकारा दिलाने की दिशा में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय को खेल प्राधिकरण व ओलंपिक और अन्य खेलों की संस्थाओं के साथ जोड़ने का फैसला किया है।

मसलन सरकार की इस तैयारियों के तहत नई दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में ही खेल मंत्रालय के लिए नई तकनीक और डिजाइन के साथ कार्यालय बनाया जा रहा है।

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खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा

सूत्रों के अनुसार खेल मंत्रालय के लिए बनाए जा रहे भवन में खिलाड़ियों के लिए अलग से लांज और अन्य सुविधाएं भी खिलाड़ियों को मुहैया कराई जाएंगी। सूत्रों के अनुसार इस नई परंपरा में मंत्रालय का स्वागत अधिकारी खिलाड़ियों के अनुरोध पर संबन्धित अधिकारी को सूचना देगा और वह अधिकारी लांज में खिलाड़ियों से मिलने स्वयं आएगा।

सरकार ने खिलाड़ियों को सम्मान और उनके मनोबल को बढ़ाने की दिशा में इस नई परंपरा को नई व्यवस्था में बदलने की योजना बनाई है। मसलन अभी तक शास्त्री भवन स्थित खेल मंत्रालय में आने वाले खिलाड़ियों को संबन्धित अधिकारियों तक पहंचने में बेहद मशक्कत करनी पड़ती है और इन्हीं परेशानियों का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार ने खेल मंत्रालय को भारतीय खेल प्राधिकरण के निकट ही स्थानांतरित करने का फैसला किया है।

खासकर मोदी सरकार का यह निर्णय दिल्ली से बाहर से खिलाड़ियों के सामने आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतलब साफ है कि जेएलएन स्टेडियम में खेल मंत्रालय का कामकाज खिलाड़ियों के मुद्दों को लेकर बेहद आसान समाधान संभव हो सकेगा।

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क्या रही सबसे बड़ी अड़चन

सूत्रों के अनुसार विदेश में भारत के लिए पदक लेकर आने वाले खिलाड़ियों को सीआईएसएफ के सुरक्षा के घेरे में शास्त्री भवन में बने खेल मंत्रालय तक पहुंचने में कई औपचारिकताएं पूरी करने के लिए विवश होना पड़ता है।

इसके लिए मंत्रालय में जाने के लिए बनाए जाने वाले प्रवेश पत्र के लिए सर्वप्रथम मंत्रालय के संबन्धित अधिकारी की अनुमति संबन्धित अधिकारी की अनुमति स्वागत कक्ष तक आने में समय की भी बर्बादी मानी जाती है।

इससे बड़ी समस्या मंत्रालय में पहुंचने के बाद भी खिलाड़ियों को अधिकारी से मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता है और उनके लिए यहां मंत्रालय में बैठने के लिए कोई विशेष आगंतुक कक्ष भी नहीं है। बहरहाल सरकार ने इसके समाधान के लिए सरकार को ही खेल और खिलाड़ियों के नजदीक लाने का निर्णय लिया है।

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