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ग्रेज्युटी बिल 2018 राज्यसभा में पास, 20 लाख का टैक्स फ्री

राज्यसभा में ग्रेज्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इस विधेयक पर कानून बनाये जाने के बाद प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों को फायदा होगा। उनकी 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी की रकम टैक्स फ्री हो जाएगी।

ग्रेज्युटी बिल 2018 राज्यसभा में पास, 20 लाख का टैक्स फ्री

संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में आज लगातार 14 वें दिन भी अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों का हंगामा जारी रहा जिसकी वजह से राज्यसभा की बैठक शुरू होने के करीब बीस मिनट बाद ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से सदन में शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो पाए। लेकिन ग्रेज्यूटी भुगतान ( संशोधन) विधेयक 2018 को बिना चर्चा के, सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।

इस विधेयक पर कांग्रेस के टी सुब्बीरामी रेड्डी ने दो संशोधन पेश किए थे। लेकिन आज उन्होंने अपने दोनों संशोधन वापस ले लिए। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इस विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के कर्मचारियों के उपदान 'ग्रेच्यूटी' की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है।

इस विधेयक पर कानून बनाये जाने के बाद प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों को फायदा होगा। उनकी 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी की रकम टैक्स फ्री हो जाएगी। यह विधेयक पेश करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और वह सदन से अनुरोध करते हैं कि इसे बिना बहस के पारित कर दिया जाए।

इस विधेयक के पारित होने से पहले सभापति एम वेंकैया नायडू ने सदन को बताया कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के संदर्भ में विभिन्न दलों के सदस्यों की ओर से उन्हें चर्चा के लिए 55 नोटिस मिले हैं जिन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन विचाराधीन नोटिसों पर अपने फैसले से वह शीघ्र ही सदन को अवगत कराएंगे। गौरतलब है कि 20 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी कि अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में उच्चाधिकारी की अनुमति के बिना नौकरशाहों की गिरफ्तारी नहीं होगी।

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न्यायालय ने यह भी कहा कि इस अधिनियम का दुरूपयोग हो रहा है। इसके बाद सभापति ने बताया कि विभिन्न दलों के सदस्यों ने आज सुबह उनसे मुलाकात की और कहा कि वह चाहते हैं, सदन चले। नायडू ने कहा कि पिछले 13 दिनों से सदन में कोई कामकाज नहीं हो पाया है। वित्त विधेयक तथा विनियोग विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक रूके हुए हैं जिन पर चर्चा होनी है और उन्हें पारित किया जाना है।

नायडू ने कहा कि मैं सदस्यों से अपील करता हूं कि सदन को चलने दिया जाए और सभी महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया जाए। ' इसी दौरान अन्नाद्रमुक और तेदेपा के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन, तथा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर आसन के समक्ष आ गए और नारेबाजी करने लगे। सभापति ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने और बैठक चलने देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मैंने सदस्यों से सदन को चलने देने और हंगामा न करने की अपील की थी। सदस्यों ने खुद मुझसे कहा था कि वह चाहते हैं कि सदन चले। लेकिन आप लोग आसन के सामने आ कर हंगामा कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि पिछले 13 दिन से सदन में कोई कामकाज नहीं हो रहा है। जिस तरह उपदान भुगतान ( संशोधन) विधेयक 2018 को पारित किया गया, उसी तरह अन्य विधेयक भी पारित किए जाने चाहिए।

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गोयल ने यह भी कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। हमने कभी नहीं कहा कि हम चर्चा नहीं चाहते। यह सदन चर्चा के लिए है। केवल चर्चा की मांग करने से कुछ नहीं होता, चर्चा में हिस्सा लेना होता है। अगर सदस्य अभी चाहें, तो हम तत्काल चर्चा के लिए तैयार हैं। सभापति नायडू ने हंगामा कर रहे सदस्यों से लौट जाने और सदन चलने देने की अपील करते हुए कहा कि क्या आप चर्चा नहीं चाहते ? क्या आप चाहते हैं कि सदन न चले ?

अपनी बात का असर होते न देख उन्होंने असहायता जाहिर करते हुए कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, मैं चर्चा की अनुमति देने के लिए तैयार हूं, फिर भी हंगामा हो रहा है। मैं ऐसे में क्या कर सकता हूं।' इसी दौरान कांग्रेस के सदस्य भी आसन के समक्ष आ कर, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संबंध में उच्चतम न्यायालय के फैसले के संबंध में चर्चा की मांग करते हुए हंगामा करने लगे।

तृणमूल कांग्रेस, बीजद और राकांपा सदस्य अपने स्थानों पर खड़े थे। सदन में व्यवस्था न बनते देख नायडू ने 11 बज कर करीब 20 मिनट पर बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी। कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने सहित विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण पिछले 13 दिनों से राज्यसभा में गतिरोध कायम है। तमिलनाडु के राजनीतिक दलों के सदस्य कावेरी मुद्दा उठा रहे हैं।

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आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों के सदस्य राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने और कडप्पा में इस्पात संयंत्र स्थापित करने की मांग कर रहे हैं। आज भी इन्हीं दलों के सदस्यों ने जब अपने अपने मुद्दे उठाने चाहे तो सभापति ने कहा कि वह सभी सदस्यों को अपनी बात कहने का मौका देंगे। नायडू ने तेलुगु देशम पार्टी के सी एम रमेश से अपना पक्ष रखने को कहा। रमेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश का जब विभाजन किया गया था तब कुछ वादे केंद्र सरकार की ओर से किए गए थे। इनमें एक वादा आंध्रप्रदेश को दस साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने का था।

रमेश ने कहा कि राज्य के विभाजन को चार साल हो गए हैं लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं किया गया है। राज्य कई परेशानियों का सामना कर रहा है। वहां की स्थिति और लोगों की भावनाओं को देखते हुए सरकार को अपना वादा तत्काल पूरा करना चाहिए ताकि राज्य के विकास में कोई बाधा न आए। आसन की अनुमति से अन्नाद्रमुक सदस्य वी मैत्रेयन ने कहा कि बैठक शुरू होने पर सभापति ने आज विश्व जल दिवस होने का जिक्र करते हुए पानी के महत्व के बारे में बताया।

सभापति ने यह भी कहा कि इस साल विश्व जल दिवस की थीम ‘नेचर फॉर वाटर' है। लेकिन तमिलनाडु के लोगों के लिए यह थीम 'कावेरी वाटर फॉर तमिलनाडु' है। वहां के लोग पानी के लिए परेशान हैं, किसानों की हालत दयनीय है। यह देखते हुए सरकार के तत्काल कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का गठन करना चाहिए। इससे पहले बैठक शुरू होने पर सभापति ने आज विश्व जल दिवस होने का जिक्र करते हुए कि इस वर्ष विश्व जल दिवस की थीम ‘नेचर फॉर वाटर' है।

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उन्होंने कहा कि पृथ्वी के तापमान में वृद्धि, भूजल के स्तर में गिरावट, जल के उपभोग के तरीके में बदलाव इस बात को रेखांकित करते हैं कि 21 वीं सदी में पानी का संकट एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमें पानी के महत्व को समझना होगा और री. यूज, रिड्यूज और री. साइकिल' को मूलमंत्र बनाते हुए जल का तथा प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करना होगा।

सभापति ने सदन को यह भी सूचित किया कि सपा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए सदन की बैठकों में शामिल होने के लिए असमर्थता जताई है और नौ मार्च से छह अप्रैल तक अवकाश का अनुरोध किया है। सदन की अनुमति से वर्मा को नौ मार्च से छह अप्रैल तक छुट्टी दे दी गई।

इनपुट भाषा

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