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चीन की अब खैर नहीं, पानी में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने उतरा युद्धपोत एलसीयू एल-52

पोत में 5 अधिकारी, 46 नाविक और 160 जवानों की सैन्य टुकड़ी भी रह सकती है।

चीन की अब खैर नहीं, पानी में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने उतरा युद्धपोत एलसीयू एल-52

अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के राज्यपाल डॉ़ जगदीश मुखी ने सोमवार को नौसेना की समुद्र तटीय ताकत में इजाफा करने वाले जंगी युद्धपोत आईएन एलसीयू एल 52 को पोर्ट ब्लेयर में बल में कमीशन किया।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को ध्यान में रखकर कोलकाता के गार्डनरीच शिपबल्डिर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा स्वदेशी आधार पर बनाया गया है। नौसेना द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक बल के लिए यह लैडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी (एलसीयू) एमके-चतुर्थ श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है।

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कमांडर चटर्जी करेंगे कमांड

युद्धपोत जलथल की लड़ाई का योद्धा है। इसे कमांडर कौशिक चटर्जी कमांड करेंगे। इसके अलावा पोत में 5 अधिकारी, 46 नाविक और 160 जवानों की सैन्य टुकड़ी भी रह सकती है। युद्धपोत की वस्थिापन क्षमता कुल करीब 830 टन है।

इतना ही नहीं इसके जरिए बड़ी संख्या में जवानों, सैन्य साजो-सामान को आसानी से समुद्र तट के करीब पहुंचाया जा सकता है। इसमें सेना का मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, टी-72, जवानों की टुकड़ियां और अन्य सैन्य वाहन शामिल है।

युद्धपोत में स्टेट ऑफ द आर्ट उपकरण और इंटीग्रेटेड ब्रिज सस्टिम (आईबीएस) और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सस्टिम (आईपीएमएस) जैसे एडवांस सस्टिम भी लगाए गए हैं।

इन जगहों पर होगी तैनाती

अभी यह युद्धपोत अंडमान-निकोबार कमांड में तैनात रहेगा। लेकिन इसे तट के करीब अभियानों, सर्च एंड रेसक्यु, राहत एवं बचाव अभियानों समेत द्वीपों पर आपदा के समय राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए किया जाएगा।

इसी श्रेणी के 6 युद्धपोतों का नर्मिाण जीआरएसई में एडवांस स्तर पर है। अगले दो वर्षों तक यह नौसेना में शामिल हो जाएंगे।

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